पुलिस ने साक्ष्य के अभाव में अंतिम रिपोर्ट 29 दिसंबर 2024 को न्यायालय में पेश कर दी थी। एसपी ने बताया कि एएसपी दक्षिणी अनुकृति शर्मा और सीओ बहजोई डॉ. प्रदीप कुमार के निर्देशन में अंतरराज्यीय बीमा गिरोह के विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में मृतक दरियाव के भाई राजेंद्र द्वारा टाटा एआईए में बीमा की राशि के लिए आवेदन किया गया।
टाटा एआईए के इंवेस्टीगेटर द्वारा इस घटना पर संदेह जताया गया कि यह मृत्यु बीमा लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से की गई। एक पूर्व नियोजित हत्या हो सकती है। इसी तथ्य के आधार पर पुलिस टीम द्वारा घटना के संबंध में साक्ष्य एकत्रित किए गए। जिसमें कुछ चौकाने वाले तथ्य सामने आए। दरियाव के नाम पर बीमा पॉलिसी संख्या 0289239916 के अंतर्गत 20 लाख रुपये का बीमा था।
बीमा अवधि 2 नवंबर 2023 से एक नवंबर 2024 तक थी। इसके अलावा दरियाव के नाम पर बजाज एलियांस की पांच लाख रुपये की पॉलिसी 28 अक्टूबर 2023 को शुरू की गई। आईसीआईसीआई की 5.34 लाख रुपये की पॉलिसी एक्सीडेंट राइडर के साथ यानी 10.68 लाख रुपये आठ दिसंबर 2023 को शुरू की गई। रिलायंस जनरल इश्योरेंस की 10 लाख की पॉलिसी 18 मई 2024 को शुरू की गई। किसान बीमा 5 लाख रुपये मृतक दरियाव की पत्नी पूजा के पीएनबी के खाते में प्राप्त हुई। कुल 50.68 लाख रुपये की पॉलिसी दरियाव के नाम से मिलीं।
इतना ही नहीं सभी पॉलिसी कराने के एक वर्ष के भीतर ही दरियाव की एक्सीडेंट में मृत्यु होना संदिग्ध लग रहा था। किसान बीमा को छोड़कर सभी पॉलिसी में नामित व्यक्ति के रूप में मृतक के भाई राजेंद्र को दर्शाया गया था। सर्विलांस के माध्यम से जब पॉलिसी अभिलेखों में दिए गए मोबाइल नंबर की गतिविधियों का विश्लेषण किया गया तो घटना के समय संदेह प्रतीत हुआ।
सभी तथ्यों के आधार पर हरिओम उर्फ हरिहर सिंह पुत्र प्यारेलाल व विनोद पुत्र प्यारेलाल निवासी गांव ढिलवारी थाना बिसौली जनपद बंदायू, पंकज राघव पुत्र प्रेमपाल सिंह निवासी रायपुर कला थाना चंदौसी को पूछताछ के लिए बुलाया गया। पूछताछ के दौरान तीनों ने स्वीकार किया उन्होंने अपने दो अन्य साथियों के साथ मिलकर दरियाव की हत्या की और इसे एक्सीडेंट का रूप दिया, ताकि दरियाव के नाम पर की गई बीमा पॉलिसी की धनराशि हड़प सकें।
एक दुर्घटना में लकवाग्रस्त हो गए थे दरियाव के पैर
- पुलिस के अनुसार मृतक दरियाव विवाहित था। उनकी एक नाबालिग पुत्री है। कुछ वर्ष पूर्व एक दुर्घटना में वह लकवाग्रस्त हो गए थे। इन बीमा पॉलिसी में नामिनी है। दरियाव की आर्थिक स्थिति भी ठीक नहीं थी और भीख मांग कर अपना जीवन यापन करते थे। उनके द्वारा इतनी सारी पॉलिसी का प्रीमियम का भुगतान करना संभव नहीं था
बीमा क्लेम में दर्ज किए गए थे आरोपियों के नाम व मोबाइल नंबर
- पुलिस के अनुसार मृतक दरियाव के पंचनामें में हरिओम व विनोद का नाम व मोबाइल नंबर बीमा क्लेम के फार्म व बीमा कंपनी द्वारा कराई गई इंवेस्टिगेशन रिपोर्ट में गवाह के रूप में दर्ज है। जबकि मृतक का भाई राजेंद्र बीमा पॉलिसी में नामिनी है। उनके मोबाइल नंबर के स्थान पर पंकज राघव नामक व्यक्ति के मोबाइल नंबर हर जगह दर्ज पाए गए।
पोस्टमार्टम में खुलासा
- पुलिस के अनुसार मृतक दरियाव का शव घटना के बाद सड़क किनारे पड़ा हुआ था। मानो किसी ने घसीट कर रखा हो। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि मृत्यु से पहले दरियाव के सिर में बायीं और दायीं ओर कान से ऊपर घाव के निशान थे। इसके अलावा शरीर पर कई जगह घसीटने के निशान मिले थे, जिससे जो एक्सीडेंट की घटना प्रतीत नहीं हो रही थी।
दो साल पहले रची गई थी साजिश
- पुलिस की पूछताछ में हरिओम उर्फ हरिहर सिंह व विनोद पुत्र प्यारेलाल निवासी गांव ढिलवारी थाना बिसौली जनपद बंदायूं, पंकज राघव पुत्र प्रेमपाल सिंह निवासी रायपुर कला थाना चंदौसी द्वारा बताया गया कि घटनाक्रम की शुरुआत 2023 में हुई। जब हरिओम को पैसे की आवश्यकता थी और वह लोन के लिए एक्सिस बैंक चंदौसी गया था। वहां उसकी मुलाकात पंकज राघव से हुई जो कि एक्सिस बैंक में मैक्स लाइफ के रिलेशनशिप एसोसिएट के पद पर कार्यरत था। हरिओम ने पंकज राघव को कहा की उसे लोन की आवश्यकता है, जिस पर पंकज राघव द्वारा उसे बताया गया कि सिविल स्कोर खराब होने के कारण हरिओम को लोन मिलना मुश्किल है। इस पर पंकज राघव ने कहा कि उसके पास एक योजना है, जिसके माध्यम से उसे काफी बड़ी धनराशि बिना लोन के भी प्राप्त हो सकती है। पंकज राघव ने हरिओम को एक ऐसे व्यक्ति की तलाश करने को कहा जो कि कैंसर या किसी गंभीर बीमारी के कारण मरणासन्न स्थिति में हो। ऐसे व्यक्ति का बीमा कराकर धोखाधड़ी से यह धनराशि हड़पी जा सकती है। पंकज राघव ने यह काम बबराला के कुछ लोगो से सीखा था जो कि उसके पास इसी तरह की पॉलिसी कराने आए थे। तब हरिओम ने दरियाव का नाम बताया। पंकज राघव द्वारा ही दरियाव के नाम बीमा पॉलिसी कराने और एक्सीडेंट के रूप में हत्या कराने का सुझाव दिया। हरिओम द्वारा यह बात अपने भाई विनोद को बताई गई जो कि लालच में आ गया और उसने अपने एक अन्य साथी को भी इस कार्य के लिए राजी कर लिया। हत्या के लिए हरिओम और विनोद ने प्रताप निवासी तारापुर थाना चंदौसी से सम्पर्क किया जो कि सजायाफ्ता मुजरिम है। आजीवन कारावास की सजा काट रहा था और 13 साल बाद जेल से बाहर आया था। 50 हजार रुपये में हत्या का सौदा हुआ था। घटना की रेकी भी की गई। हत्या में प्रयुक्त कार शादी में जाने के बहाने से विनोद ने किराये पर ली थी।
ऐसे दिया वारदात को अंजाम
- घटना के दिन विनोद, प्रताप के साथ बिसौली जाकर दरियाव को घटनास्थल पर कार से लेकर आया था। हरिओम भी समय से घटनास्थल पर पहुंच गया था और उसने अपने अन्य साथी को भी वहीं बुला लिया था। फिर इन लोगों ने शराब पी और दरियाव को ज्यादा शराब पिलाई। सैनिक चौराहे से आटा की तरफ गाडी रोक दी। कार खराब होने की बात कही। इसी दौरान विनोद ने दरियाव के सिर पर हथौडी से वार कर हत्या कर दी और शव घसीट कर सड़क किनारे फेंक दिया।
यह हुई बरामदगी
- पुलिस ने हत्यारोपियों से एक हथौड़ी, ईको गाड़ी, दरियाव के एक्सिस बैंक की पासबुक, डेबिट कार्ड, चेकबुक, मृतक के भाई राजेंद्र का डेबिट कार्ड, चेकबुक, पॉलिसी संबंधित अन्य दस्तावेज, दो जाली स्टाम्प (मोहर) थाना कोतवाली चंदौसी लिखी हुई, एक एफआईआर 343/2024 धारा 381/106 (1) बीएनएस, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, पंचायतनामा, एक मोबाइल बरामद किया है।