हाफिजपुर गांव में कांवड़ जुलूस को लेकर दो समुदायों में शुरू हुई तनातनी अभी भी बरकरार है। इस मामले में पुलिस ने दोनों पक्षों के चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। बाकी के ठिकाने अभी पुलिस तलाश कर रही है। फिलहाल पुलिस के साथ खुफिया तंत्र भी सतर्क है। हर गतिविधि की निगरानी की जा रही है। गांव में तीन थानों पुलिस तो पहले से तैनात है। सोमवार को डेढ़ सेक्शन पीएसी भी पहुंच गई है।
हाफिजपुर गांव में 24 फरवरी को डीजे संग कांवड़ जुलूस निकाला जा रहा था। जब जुलूस को डीजे बजाते हुए मुस्लिम इलाके में ले जाने का प्रयास किया गया तो टकराव हो गया। कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक बृजमोहन गिरी ने दोनों पक्षों के 23 लोगों के खिलाफ कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई है।
कोतवाली के प्रभारी ने बताया कि दोनों पक्षों के चार लोग गिरफ्तार हुए हैं जो लोग घर छोड़कर भागे हैं उनकी तलाश में दबिश दी जा रही है। उनके मुताबिक मुश्ताक पुत्र बहुरन, जाकिर पुत्र इतवारी और कुंवरपाल कश्यप पुत्र नत्थू और धीर सिंह पुत्र राजाराम को गिरफ्तार किया गया है।
नामजद लोगों के संभावित ठिकानों को तलाशा जा रहा है जबकि जो लोग अज्ञात हैं उन्हें ट्रेस किया जा रहा है ताकि विवेचना आगे बढ़ सके। गांव में हयातनगर, असमोली और नखासा की पुलिस को तैनात किया गया है। जबकि डेढ़ सेक्शन पीएसी भी कैंप करेगी।
नामजदगी पर उठ रहे सवाल, आरोपी बोले हमें फंसाया गया
संभल। पुलिस की नामजदगी पर सवाल उठ रहे हैं, बवाल के आरोप में पकड़े गए धीरसिंह और जाकिर का कहना है कि कुवंरपाल तो गांव में ही नहीं था। जबकि मुश्ताक अपने खेत पर था। इससे जाहिर है कि पुलिस ने जिन लोगों को नामजद किया है।
उनमें से कई लोग बवाल में नहीं थे। भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष डा. नरेंद्र सिंह का कहना है कि गिरफ्तारी से ज्यादा जरूरी है गांव का सौहार्द्र। त्योहार सामने है इसलिए किसी को गिरफ्तार न किया जाए बल्कि पंचायत से मामले को निबटाया जाए।
आरोपी बोला- बवाल के वक्त तो मैं खेत में था, सब प्रधान का खेल
गांव में किसी से पूछ लो, मैं बवाल के समय मौके पर था या नहीं। मैं तो अपने खेत में गन्ने के अगोले छील रहा था और खेत में ही पता लगा कि गांव में तनाव है और पुलिस पहुंच गई है। मैं खेत से सीधे अपने घर पहुंच गया था। जहां तक एफआईआर की बात है इसे तो गांव के प्रधान ने लिखवाया है। इस एफआईआर में उसके ही नाम हैं जो प्रधान का नहीं है।
मुश्ताक।
मैं ससुराल में था, मुझे तो दरोगा ने ही बुलाया था
मेरे ससुर का निधन हो गया था। मैं 24 फरवरी को विवाद के दिन अपनी ससुराल भिड़वारी में था। मेरा नाम पता नहीं किस व्यक्ति ने एफआईआर में लिखवा दिया। पुलिस ने रात्रि में मुझे पुलिस चौकी मोहम्मदपुर टांडा में बुलवाया मैं पहुंच गया। तब दरोगा ने गाली देते हुए कहा कि- तुम बवाल में थे। कुंवर पाल
अब फोन हुए स्विच ऑफ, नामजद तलाश रहे बचाव का रास्ता
संभल। पुलिस की एफआईआर में जिनके नाम खुल गए हैं। उनकी तलाश में दबिश दी जा रही है। पुलिस के बचने के लिए अपने फोन स्विच ऑफ कर नामजद लोग गांव से इधर-उधर हो गए हैं। बचाव का रास्ता तलाश रहे हैं। कुछ नामजद आरोपी नेताओं की शरण में गए हैं, जबकि कई तो डरे हुए हैं। आरोपियों ने अपने नेताओं से अधिकारियों को फोन कराए हैं। फोन पर सिफारिशें कराई जा रही हैं। जबकि एसपी का कहना है कि पुलिस का पहला काम कानून व्यवस्था को कायम करना है। इसमें पुलिस पीछे नहीं रहेगी।
खुफिया तंत्र ने दिया बवाल का इंपुट
संभल। हाफिजपुर गांव में डेढ़ सेक्शन पीएसी के साथ जिले के तीन थानों की पुलिस को राउंड द क्लाक निगरानी के लिए लगाया गया है क्योंकि गांव में बवाल होने का अंदेशा है। खुफिया तंत्र ने इस बारे में पुलिस अधीक्षक को इनपुट दिया है। इसी आधार पर गांव में पुलिस और पीएसी की निगरानी की व्यवस्था की गई है।