ऋषिपाल सिंह दद्दा का फाइल फोटो।
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संभल जिले की सियासत के चाणक्य माने जाने वाले गुन्नौर के पूर्व विधायक ऋषिपाल सिंह दद्दा का लंबी बीमारी के बाद शनिवार की शाम को निधन हो गया। वह 80 वर्ष के थे। उनके निधन की खबर फैलते ही शोक की लहर दौड़ गई। वह मुलायम सिंह यादव के परिवार के भी काफी करीबी थे।
गुन्नौर क्षेत्र के एहरौला नौआबाद गांव निवासी ऋषिपाल सिंह यादव उर्फ दद्दा 1967 में पहली बार जनसंघ से विधान सभा का चुनाव लड़े लेकिन हार गए। 1969 में फिर हुए विधान सभा चुनाव में जनसंघ से ही विधायक बने। 1974 में चुनाव हारने के बाद 1990 जनता दल से जुड़े, बदायूं के जिलाध्यक्ष भी रहे।
इसी साल सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव का साथ मिला तो एमएलसी चुने गए। उन्होंने बदायूं में कई नेताओं को सियासत सिखाई। वह बबराला में बाबूराम भाय सिंह डिग्री कालेज व इंटर कालेज के संस्थापक भी थे। वह 2017 के विधान सभा चुनाव में अपने पौत्र सुमित यादव को विधान सभा का चुनाव लड़ाना चाहते थे।
लेकिन सपा ने टिकट नहीं दिया तो वह सपा से रूठ गए थे, उन्होंने अपने पौत्र को निर्दलीय चुनाव लड़ाने का एलान कर दिया था, जिससे सपा में खलबली मच गई। मुलायम सिंह के भतीजे और सांसद धर्मेंद्र यादव ने उनके घर जाकर चुनाव नहीं लड़ने के लिए मनाया था। एक मई-2018 को दद्दा का 80वां जन्म दिन मनाया गया था। पांच महीनों से दद्दा की तबीयत खराब चल रही थी।
उनका उपचार नोएडा के कैलाश हास्पिटल से चल रहा था। शनिवार को वह बबराला स्थित अपने आवास पर थे, जब उन्हें सीने में दर्द उठा। नोएडा ले जाया जा रहा था लेकिन शाम को छह बजे रास्ते में ही उनका निधन हो गया।