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Sambhal News: पांच माह बीते, अस्पताल को नहीं मिला आंखों का डॉक्टर

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संभल। जिला अस्पताल में नेत्र चिकित्सक की तैनाती न होने से मरीज महीनों से इलाज के लिए चक्कर काट रहे है। पांच महीने से अस्पताल में नेत्र सर्जन का पद रिक्त है। अस्पताल में ऑपरेशन नहीं हो रहे है। सीएमएस डॉ. अनूप अग्रवाल ने बताया कि पांच महा पहले डॉ. राजेश कुमार को संभल के लिए रिलीव किया गता था, लेकिन वह चार्ज नहीं ले रहे है।
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जिला अस्पताल में रोजाना 150 के करीब आंखों के मरीज पहुंचते हैं। इनमें से किसी को आंखों में इंफेक्शन होता है, तो किसी को दर्द की शिकायत रहती है। दूर-दराज से पहुंचे मरीज जिला अस्पताल में पर्चा बनवाने के लिए लाइन में खड़े रहते है। करीब डेढ़ घंटे के इंतजार के बाद पर्चा तो बन जाता है, लेकिन ओपीडी में पहुंचकर पता चलता है कि अस्पताल में आंखों का डॉक्टर ही नहीं है। इस पर उन्हें बिना उपचार के ही वापस लौटना पड़ता है।
मरीजों की यह कहानी एक दो दिन की नहीं है, बल्कि पांच महीने से लगातार ऐसा ही हो रहा है। जिला अस्पताल में तैनात डाॅ. शम्मी कपूर जब से गए हैं, तब से अस्पताल में कोई आंखों का डॉक्टर नहीं आया। जबकि बीते दिनों आई फ्लू वायरस से हर तीसरा व्यक्ति पीड़ित नजर आया था। उधर, सीएमएस डाॅ. अनूप अग्रवाल बताते हैं कि रामपुर जिले से एक जुलाई को डाॅ. राजेश कुमार का तबादला संभल के लिए हुआ है, लेकिन वह नहीं आए हैं, जबकि वह वहां से रिलीव भी हो गए हैं। इस संबंध में हम भी शासन स्तर पर पत्राचार कर रहे हैं। हर 15 दिन में रिमाइंडर भेजा जा रहा है। उम्मीद है कि जल्द आंखों का चिकित्सक जिला अस्पताल को मिल जाएगा।
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यह बोले मरीज
- कई बार आंखों को दिखाने के लिए जिला अस्पताल आ चुका हूं। यहां पर आंखों का कोई डाॅक्टर नहीं मिलता है। बुजुर्ग हूं, मुश्किल से सीढि़यां चढ़कर ऊपर जाता हैं, लेकिन ओपीडी में पहुंचकर चिकित्सक नहीं मिलते। -रियाजुल हसन, संभल।
- आंखों में पानी आने की समस्या है। इसे दिखाने के लिए जिला अस्पताल पहुंचा, तो पहले डेढ़ घंटे लाइन में लगना पड़ा। पर्चा बनवाने के बाद ओपीडी में पहुंचा तो चिकित्सक नहीं मिले। बताया गया कि अस्पताल में कई माह से चिकित्सक ही नहीं है। -जरीफ सलमानी, महमूदपुर माफी।
- आंखों में जलन होती है। परेशान रहती हूं। खेत पर काम करने जाते वक्त समस्या ज्यादा होती है। कई बार दिखाने पहुंच चुकी हूं, लेकिन डाॅक्टर नहीं मिल रहे हैं। -पूनम, मन्नीखेड़ा।
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- आंखों को दिखाने के लिए कई चक्कर लगा चुकी हूं। हर बार यही सोचकर आती हूं कि चिकित्सक मिल जाएंगे, लेकिन चिकित्सक मिलते नहीं हैं। बड़ी समस्या है।

- प्रेमवती, मन्नीखेड़ा।
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