जिला अस्पताल में सूना पड़ा पंजीकरण कक्ष।
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केंद्र सरकार ने बजट में सभी को चिकित्सा सुविधा दिलाने के लिए मेडिकल बीमा के रूप में बड़ी पहल की है। मगर सरकारी अस्पताल की सेहत खस्ताहाल बनी है। जिला अस्पताल में शासन से स्वीकृत 23 पदों के सापेक्ष महज सात पदों पर ही डाक्टरों की तैनाती है पर एक डाक्टर लंबी छुट्टी पर हैं। एक डाक्टर बिना सूचना दिए लापता हैं। इनमें एक डाक्टर सीएमएस के पद पर हैं। यानि मरीजों को देखने के लिए सिर्फ चार ही डाक्टर हैं।
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. एके गुप्ता का कहना है कि शासन को डाक्टरों की तैनाती के लिए प्रस्ताव भेजा है पर कब डाक्टर मिलेंगे और कब जनता को सहूलियत मिलेगी। इस सवाल पर वह कुछ कहने को तैयार नहीं है।ऐसे में अस्पताल की ओपीडी के हालात भी दयनीय हैं। ओपीडी का समय सुबह 8 से दोपहर 2 बजे तक का है लेकिन डाक्टरों की संख्या कम होने से मरीज भी घटने लगे हैं। निर्धारित समय 2 बजे से पहले शुक्रवार को ओपीडी में सन्नाटा पसर गया था।