चंदौसी। रविवार की रात किसी समय चंदौसी तहसील परिसर स्थित उपनिबंधक कार्यालय में संदिग्ध परिस्थितियों में आग लग गई। जिससे करीब 94 जिल्दे जलकर राख हो गई। इसमें करीब एक हजार से अधिक किसानों के जमीनों का रिकार्ड स्वाहा हो गया है। यह किसानों के लिए भारी क्षति है। अब इन किसानों के जमीनों की खरीद फरोख्त भी नहीं हो सकेगी। प्रथम दृष्टया आग लगने का कारण शार्ट सर्किट बताया जा रहा है। मामले की रिपोर्ट अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) को भेजी गई है, साथ ही कोतवाली पुलिस को भी तहरीर दी गई है।
चंदौसी का उपनिबंधक कार्यालय तहसील परिसर में ही स्थित हैं। जहां तहसीलदार के साथ-साथ सैकड़ों राजस्व कर्मी रहते हैं। लेकिन अवकाश के दिन रविवार को किसी समय उपनिबंधक कार्यालय में आग लग गई। खास बात तो यह है कि किसी राजस्व कर्मी को न तो धुआं दिखाई दिया और न ही आग की लपटें। सोमवार को उपनिबंधक कार्यालय के कर्मचारी कार्यालय खोलने पहुंचे तो खलबली मच गई।
अंदर कार्यालय में धुआं भरा था। कुछ फाइलें भी जल रही थी। अग्नि शमन केंद्र को सूचना देकर किसी तरह आग पर काबू पाया गया। उपनिबंधक सुबोध कुमार राय ने बताया कि आगे की ओर रखी 94 जिल्दें जल गई हैं, जिनमें करीब एक हजार से अधिक भूमि स्वामियों के बैनामे आदि का रिकार्ड था। अब इन भूमि स्वामियों का कोई रिकार्ड उप निबंधक कार्यालय में नहीं रहा। हालांकि उसके बाद रखी जिल्दों को बचा लिया गया है। प्रथम दृष्टया देखने में लगता है कि आग शार्ट सर्किट के कारण लगी होगी लेकिन किसी की शरारत से भी इनकार नहीं किया जा सकता है। अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) संभल को पूरी रिपोर्ट भेजी गई है। कोतवाली पुलिस को भी तहरीर दी गई है, ताकि जांच हो सके कि आग कैसे लगी।
एक हजार से अधिक किसानों की जमीनों के नहीं हो सकेंगे बैनामे
चंदौसी। उपनिबंधक कार्यालय में आग लगने से एक हजार से अधिक किसानों को भारी घाटा पहुंचा है। उनकी जमीनों का पूरा रिकार्ड खत्म हो गया है। अब यदि वह जमीन को खरीदना और बेचना चाहें तो बैनामा भी नहीं हो सकेगा।
एक जनवरी 2017 से भूमि के रिकार्ड को ऑन लाइन कर दिया गया है, लेकिन इस अवधि में जमीन की खरीद फरोख्त, बैनामों आदि का पूरा रिकार्ड ऑन लाइन है। इनका यदि पूरा रिकार्ड जल भी जाए तो कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा लेकिन सोमवार की सुबह जो भूमि का रिकार्ड जला है, वह ऑनलाइन अवधि से काफी पुराना है, इसलिए इन जमीनों का रिकार्ड ऑनलाइन नहीं था। अब जिस जमीन पर जो काबिज है, वह उसका मालिक है, क्योंकि रिकार्ड ही नहीं है। ऐसे में इन जमीन स्वामियों को अपनी जमीन को बेचना हो या फिर इस क्षेत्र में जमीन खरीदना हो तो यह संभव नहीं हो सकेगा। हालांकि शासन के आदेश पर पुन रिकार्ड को तैयार किया जा सकता है लेकिन इसके लिए काफी लंबी प्रक्रिया से ही गुजरना पड़ेगा।