जिले के स्थानांतरित मुख्य विकास अधिकारी शंकरलाल त्रिपाठी और जिला कंसलटेंट पद पर तैनात महिला कर्मचारी के बीच फोन पर हुई वार्ता का प्रकरण अभी ठंडा नहीं पड़ा। महिला कर्मचारी की शिकायत पर उत्तर प्रदेश के अनुसूचित जाति जनजाति आयोग की टीम शनिवार को जांच करने संभल पहुंची।
टीम के उपाध्यक्ष और दो सदस्यों ने महिला कर्मचारी के बयान लिए। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से बातचीत की। इसके बाद अपर पुलिस अधीक्षक को एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए। महिला कर्मचारी ने मौके पर ही तहरीर लिख कर दी। अपर पुलिस अधीक्षक कलमेश दीक्षित ने कहा कि स्थानांतरित हुए मुख्य विकास अधिकारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज िकया गया।
संभल जिले में मुख्य विकास अधिकारी के पद पर तैनात रहे शंकर लाल त्रिपाठी अब आयुक्त ग्राम्य विकास के कार्यालय से संबद्ध हैं। उनके खिलाफ जिला कंसलटेंट के पद पर तैनात महिला कर्मचारी ने कई गंभीर आरोप लगाए हैं। साथ में फोन पर हुई बातचीत की काल रिकार्डिंग पेश की है, जिसमें मुख्य विकास अधिकारी रहे शंकर लाल त्रिपाठी प्रेमालाप कर रहे हैं।
इस प्रकरण में महिला कर्मचारी ने अनुसूचित जाति जनजाति आयोग के समक्ष शिकायत की थी। शिकायत के बाद अनुसूचित जाति जनजाति आयोग के उपाध्यक्ष मुकेश सिद्धार्थ, आयोग के सदस्य सागर धानुक और संजय कुमार सविता संभल पहुंचे। संभल में लोक निर्माण विभाग के निरीक्षण भवन में उन्होंने महिला कर्मचारी का बयान लिया।
महिला कर्मचारी ने जिलाधिकारी समेत जिले के कई अफसरों पर आरोप लगाए लेकिन आयोग के उपाध्यक्ष ने साफ कर दिया कि जिलाधिकारी की इसमें कोई भूमिका नहीं है। यदि महिला कर्मचारी, डीएम से शिकायत करती और डीएम उसकी सुनवाई न करते तो कुछ कहा जा सकता था। आयोग के उपाध्यक्ष ने जिला प्रशासन की अब तक की कार्रवाई पर संतोष व्यक्त किया। मौके पर मौजूद अपर पुलिस अधीक्षक से कहा कि महिला तहरीर दे तो तत्काल उसकी एफआईआर दर्ज कर लें। जांच होने पर हकीकत साफ हो जाएगी।