आमतौर पर जून, जुलाई में भरपूर बारिश होती है, लेकिन इस बार वर्षा कम हुई है। बीते वर्ष जून में 51.2 मिमी वर्षा हुई थी। जबकि, इस वर्ष जून में 7.62 मिमी वर्षा हुई है। बारिश कम होने से एक ओर जहां धान की रोपाई प्रभावित हुई है। वहीं, दूसरी ओर जिले में सूखे के हालात बन गए हैं। बारिश की मौजूदा स्थिति को देखते हुए किसानों के चेहरे पर चिंता है। ग्रामीण फीडरों से पर्याप्त बिजली नहीं मिल पा रही है। इससे किसानों की समस्याएं और बढ़ गई हैं।
संभल जिले में 1.99 लाख हेक्टेयर जमीन पर खेती होती है। करीब तीन लाख परिवार खेतीबाड़ी से जुड़े हैं। जून में बारिश नहीं हुई। अब तक जुलाई में भी बहुत कम बारिश हुई है। कृषि विभाग से मिले आंकड़ों के मुताबिक जनपद संभल में जून 2018 में 7.62 मिमी वर्षा हुई, जबकि जून 2017 में 51.2 मिलीमीटर वर्षा हुई थी।
जुलाई में अब तक 53.36 मिलीमीटर वर्षा हुई है, जबकि पिछले वर्ष अब तक 128 मिलीमीटर से ज्यादा वर्षा हुई थी। अगर यही हाल रहा तो जिले के लोगों की आर्थिक स्थिति पर प्रभाव पड़ेगा। क्योंकि जनपद में गन्ना, आलू, गेहूं और मेंथा मुख्य फसलें हैं। 2017-18 में जिले के किसानों ने एक हजार करोड़ रुपये का गन्ना बेचा था।
इसके बाद मेंथा और आलू से किसानों की आमदनी हुई। खेती किसानी ही संभल की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। वहीं, बारिश कम होने से अगर खेती को झटका लगा तो इसका असर संभल के हर क्षेत्र पर पड़ेगा। उधर, जनपद में सिंचाईं के साधनों का बुरा हाल है।
मध्य गंगा नहर परियोजना का निर्माण कार्य 2008 में शुरू हुआ जो अभी तक पूरा नहीं हो सका है। भूजल स्तर भी पांच से छह फीट कम हो गया है। इस कारण कई नलकूप जवाब दे गए हैं। उप निदेशक कृषि प्रसार हीरा सिंह झीना ने बताया कि इस बार बीते वर्ष के मुकाबले बारिश बहुत कम हुई है।
संभल/बबराला। गंगा नदी के जलस्तर पर लगातार बढ़ोत्तरी के बाद बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में सतर्कता बढ़ा दी गई है। बिजनौर बांध से छोड़ा गया अतिरिक्त पानी नरौरा होते हुए जुनावई क्षेत्र तक पहुंच सकता है। लेखपालों ने बाढ़ आशंकित गांवों को दौरा किया और जायजा लेकर इसके रिपोर्ट प्रशासन को दी है। पानी बढ़ने का असर अगले दो दिन में नरौरा के बाद जुनावई क्षेत्र में हो सकता है। राहत की बात यह है कि पहाड़ों पर बारिश रुकने के बाद हरिद्वार में पानी का बहाव कम हुआ है।
पहाड़ों पर रुक-रुक कर हो रही बारिश के बाद गंगा नदी समेत उसकी सहयोगी नदियां में पानी बढ़ गया है। हरिद्वार गंगा बैराज से सोमवार व मंगलवार को एक लाख से क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ा गया। इससे मैदानी भागों में गंगा नदी का जलस्तर बढ़ गया। बिजनौर बांध से भी अतिरिक्त पानी छोड़े जाने के बाद जिसका असर नरौरा के गंगा बैराज पर हुआ है। नरौरा में मंगलवार को 29,673 क्यूसेक प्रति सेकेंड की दर से पानी छोड़ा गया था जो कि बुधवार को बढ़ गया और 46603 क्यूसेक प्रति सेकेंड की दर पर हो गया।
इससे जुनावई क्षेत्र के गंगा की तराई वाले इलाके में पानी बढ़ने की आशंका है। वहीं इससे पहले बिजनौर में मंगलवार को पानी का बहाव 62520 क्यूसेक प्रति सेकेंड था जो बुधवार को 1,21,201 क्यूसेक प्रति सेकेंड हो गया है। इसका असर अगले दो दिन में नरौरा बैराज पर पड़ेगा। जहां पानी का बहाव बढ़ सकता है।
इससे जुनावई क्षेत्र के गंगा की तराई वाले इलाके में बाढ़ को लेकर हलचल मचेगी। क्योंकि पिछले वर्ष मात्र 80 हजार क्यूसेक प्रति सेकेंड की दर पर पान आने से संभल जिले के रघुपुर पुख्ता में बाढ़ आ गई थी। हरिद्वार से राहत की खबर है कि गंगा में पानी कम हुआ है।
वहां से बुधवार को 45439 क्यूसेक की दर से पानी छोड़ा गया। बहरहाल प्रशासन ने सतर्कता दिखाते हुए बाढ़ प्रभावित वाले इलाकों पर लेखपालों को जायजा लेने के लिए भेजा है। लेखपालों ने अपनी रिपोर्ट एसडीएम को दी है।