सब्जियों के राजा कहे जाने वाले आलू के इस सीजन में हालात बदले हैं। आलू का उत्पादन घटा है और मांग पर्याप्त निकल रही है। खेत में ही आलू खरीदा जा रहा है जबकि पिछले सीजन में मंडी ले जाने पर भी आलू की बिक्री नहीं हो पा रही थी।
आलू की मांग निकलने से दाम में प्रति क्विंटल 300 से 400 रुपये तक का उछाल आ गया है। दाम बढ़ने से किसानों का घाटा कवर हो रहा है तो उपभोक्ता पर महंगाई की मार पड़ रही है। यह तो सीजन का हाल है जब सीजन नहीं होगा तब क्या होगा। जाहिर है कि आलू महंगा मिलेगा। आलू के दाम 2000-3000 रुपये क्विंटल तक छू सकते हैं। ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है लेकिन मांग और आपूर्ति के सिद्धांत से ही आगे की कीमतें तय होने के आसार हैं। पर ऐसा लगता है गर्मी के मौसम में आलू के दाम आसमान छूने को बेताब होंगे।
पिछले सीजन में आलू की फसल घाटे का सौदा साबित हुई थी। संभल जिले के शीतगृह फुल हो गए थे। अधिक पैदावार होने से दाम गिर गए। आलू की बेकदरी हुई थी। बाजार में आलू का 50 किलो आलू का कट्टा 150 रुपये तक में बिक रहा है। जबकि शीतगृह ही प्रति कट्टे का किराया 140 रुपये से 150 रुपये तक ले रहे हैं। किसानों ने आलू,शीतगृहों में ही छोड़ दिया था। जब किसान नहीं आए तो कोल्ड स्टोरेज मालिकों ने आलू को सड़कों के किनारे फेंक दिया था। मंदी से आलू का रकबा घटा। उपज कम हुई। खपत निकली तो दाम बढ़ गए। उत्तर प्रदेश के लखनऊ, बाराबंकी, रामनगर, हल्द्वानी, इलाहाबाद, कानपुर, दिल्ली के अलावा अन्य बड़े शहरों की मंडियां हैं। जहां आलू की पर्याप्त डिमांड है। इसीलिए आलू के दाम में उछाल आया है।