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Sambhal News: अकीदत के साथ मनाई गई ईद-ए-मुबाहिला

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सिरसी। कस्बा में अकीदत और एहतराम के साथ ईद-ए-मुबाहिला मनाई गई। इस अवसर पर कस्बे की मस्जिदों में विशेष नमाज के साथ अमाल अदा किए गए। उलेमाओं ने फजीलत बयान की। इमाम बारगाहों और अजाखानों में महफिलें आयोजित की गई।
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इस्लामी कैलेंडर के अनुसार 24 जिल हिज्जा को नबी-ए-करीम अपनी बेटी फात्मा जहरा, हजरत अली और अपने नवासों इमाम हसन और हजरत इमाम हुसैन के साथ मुबाहिला करने गए थे। इसी खुशी में हर साल ईद-ए-मुबाहिला मनाई जाती है। मोहल्ला सादक सराय में इमाम बारगाह गर्बी में हुई महफिल जश्ने मुबाहिला में दूसरे जिलों से आए शायरों ने कलाम पेश कर वाहवाही हासिल की। इस दौरान बड़ी संख्या में अजादार मौजूद रहे।
शबरोज कानपुरी ने अपना कलाम पेश करते हुए कहा कि चौदह सौ बरस के बाद भी हम कुर्बान हैं अपने मौला पर, लब्बैक के नारे का रिश्ता हलमिन की सदा से मिलता है। मनाजिर अख्तर फतेहपुरी ने कहा- बोली क़जा ये देख के रन में हबीब को, पहले भी मिल चुकी हूं में इस नौजवान से। अली हसन जाफर ने कुछ इस तरह पढ़ा पढ़ा- हैं जिस जिसके नबी मौला उसी के अली मौला बनाए जा रहे हैं।
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महफिल की सदारत मौलाना समर अब्बास ने की। तिलावत मौलाना शमीम ने और संचालन माैलाना सफी असगर नजमी ने किया। इस दौरान मौलाना इकरार रजा आब्दी ने तकरीर की। इसके अलावा अन्य अजाखानों में भी महफिल का आयोजन किया गया।
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