गांव बिचपुरी सैलाब निवासी हंसराज (45) किसान थे लेकिन अपनी खेती से ज्यादा बच्चों की शिक्षा की फिक्र रखते थे। पांच संतानों के पिता हंसराज ने बेहतर पढ़ाई के लिए ही सबसे छोटे दो बेटों का दाखिला नरौरा के इरीगेशन इंटर कॉलेज में कराया था। इन बेटों को छोड़ने जाते समय हुए हादसे ने बाइक सवार तीन जिंदगियों के साथ उन सपनों को भी रौंद किया, जो किसान परिवार ने देखे थे।
नरौरा गंगा पुल पर रोडवेज बस से बाइक कुचल जाने के कारण हंसराज और बेटे मनोज (15) और मोहन (10) की जान चली गई। हादसे की जानकारी मिलते ही तमाम ग्रामीणों ने गुन्नौर सीएचसी का रुख किया। उम्मीद थी कि पिता-पुत्र वहां भर्ती मिलेंगे लेकिन सामना तीन शवों से हुआ। ग्रामीणों ने बताया कि बेटों की पढ़ाई से कोई समझौता न हो, इसके लिए हंसराज ने नरौरा में मकान ले लिया था। बेटों को जरूरी सामान दिलाने के लिए वह रविवार की छुट्टी में उन्हें गांव लाए थे। सोमवार को वह समय से कॉलेज पहुंच सकें, इसके लिए एक दिन पहले रविवार शाम को ही बेटों के साथ नरौरा के लिए चल पड़े। यही नहीं दिनभर गांव में घर व खेती संभालने के साथ वह रोज रात में बेटों के पास नरौरा चले जाते थे। किसी को उम्मीद नहीं थी कि रविवार शाम का सफर जिंदगी का आखिरी सफर साबित होगा। परिवार में तीन मौत से हंसराज की पत्नी, बेटे विष्णु (20), लखन (17), बेटी प्रीति (16) के आंसू थम नहीं रहे हैं।
रोडवेज बस में थे 40 यात्री दूसरे वाहनों का लिया सहारा
हादसे का कारण बनी बुलंदशहर डिपो की रोडवेज बस में 40 यात्री सवार थे। हादसे के बाद तुरंत बाद पहुंचे थाना प्रभारी निरीक्षक अतर सिंह ने किसान हंसराज और उनके दोनों बेटों को अपनी गाड़ी से ही सीएचसी पहुंचाया, जहां तीनों को मृत घोषित कर दिया गया। मौके पर मौजूद पुलिस ने बस की सवारियों के अन्य बसों व वाहनों में बैठाने की व्यवस्था कराई। मौके से क्षतिग्रस्त बाइक और बस हटवाकर रास्ता क्लियर कराया।