संभल। गांवों में कुत्तों को पकड़ने के लिए कोई अभियान नहीं चलाया जा रहा है। जबकि यह लगातार लोगों पर हमला करके उन्हें जख्मी बना रहे हैं। कुत्तों के न पकड़े जाने से लोगों में डर और दहशत बरकरार हैं।
11 जनवरी को गांव पौटा में कुत्तों ने नौ वर्षीय रिया को नोच-नोंचकर मार डाला था। गांव के लोगों का कहना है कि दिन में खेतों पर जाने में डर बना रहता है और शाम को कुत्तों के डर की वजह से घरों से नहीं निकल रहे हैं। दूसरी ओर, बुधवार को ओबरी गांव में आबादी के नजदीक लिंक मार्ग किनारे कुत्तों के झुंड को नजदीक देख लोग डर गए।
लोगों का अधिकतर इसी मार्ग से आवागमन रहता है। इसके अलावा गांव में और भी कई झुंड कुत्तों के नजर आते हैं। अभी गांव में कुत्तों को पकड़ने के लिए श्वान ने कोई कदम नहीं उठाया हैं। इसके लिए पशुपालन विभाग और पंचायती राज विभाग की भी जिम्मेदारी है कि वह अवारा कुत्तों की धरपकड़ कर होने वाली घटनाओं को रोकें।
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यह बोले लोग
गांव में कुत्ते पकड़ने के लिए अभी तक कोई नही आया है। बड़ी संख्या में कुत्ते मौजूद हैं। कुत्तों ने गांव की एक बच्ची को नोच-नोचकर मार दिया था। गांव में कुत्तों की दहशत बनी हुई है।
पवन कुमार, गांव पोटा।
गांव में भैंस-बकरियों को काटकर कुत्ते जख्मी कर रहे हैं। कुत्ते पकड़ने के लिए कई बार कहा गया लेकिन अभी तक कुत्ते नहीं पकड़े गए हैं। गांव में डर का माहौल बना हुआ है।
भोलू सिंह, गांव पौटा।
घर की छत पर दो बकरियां बंधी थीं। कुत्तों ने हमला करके दोनों बकरियों को मार दिया था। गांव में आवारा कुत्तों से बहुत परेशानी हो रही है। कुत्ते पूरे गांव में भागे फिरते हैं।
अजयवीर सिंह, गांव पौटा।
नौ दिन पहले हमारा कटरा टावर के पास प्लाट में बंधा था। कुत्तों ने हमला करके उसे काट लिया था। इन कुत्तों से बच्चों, बड़ों को बहुत परेशानी हो रही है। अब जानवर भी बाहर नहीं बांध सकते हैं। हमारी मांग है कि कुत्तों से बचाव हो और कुत्ते पकड़े जाए।
अलका, गांव पौटा।
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अवारा कुत्तों ने अब लोगों के साथ ही पशुओं को अपना निशाना बनाना शुरू कर दिया है। करीब एक माह पहले टांडाकोठी गांव में पशुशाला में घुसकर दो बकरियों को मार दिया। तब से लोगों में डर का माहौल है।
शान अली, गांव ओबरी।
एक सप्ताह पहले शाम को खाना खाकर घूमने निकला था। रास्ते में कुत्तों के झुंड ने हमला कर दिया। शोर शराबा सुनकर लोग दौड़ पड़े। कुत्तों को ललकारा, तब कुत्ते मुझे छोड़कर भाग गए। अगर समय रहते लोगों का सहयोग न मिलता तो बड़ी घटना हो सकती थी।
मोहम्मद नाजिम, गांव ओबरी।
रजपुरा क्षेत्र में कुत्तों को पकड़ने की प्रक्रिया विचाराधीन है। फिलहाल बंदरों को पकड़ने के लिए वन विभाग को जिम्मेदारी दी गई है।
डॉ. आदेश कुमार, बीडीओ, रजपुरा।