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कुरान सिर्फ पढ़ें ही नहीं, बल्कि इस पर अमल भी करें : मौलाना

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सिरसी में शबीहे ताबूत के जुलूस में शामिल लोग। संवाद - फोटो : गणपति बप्पा की मूर्ति तैयार करता कलाकार।
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सिरसी। सिरसी में हजरत इमाम हसन की शहादत पर इमाम बारगाहों और अजाखानों में मजलिसें आयोजित की गईं। गमगीन माहौल में शबीहे ताबूत के जुलूस निकाले गए। इसमें अंजुमनों ने नोहाख्वानी और सीनाजनी की।
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इमाम बारगाह मोहल्ला शर्की सादात में हुई मजलिस में मर्सिया खाबर रजा और उनके साथियों ने पढ़ा। मजलिस को डॉ. मोहम्मद हुसैन जाफरी ने संबोधित करते हुए कहा कि नबी ए करीम ने कहा था कि मैं तुम्हारे बीच दो चीजें छोड़ कर जा रहा हूं, एक कुरान और दूसरी एहलेबैत कुरान। इसे पढ़ने के साथ इस पर अमल भी करें। मजलिस के बाद हाजी इस्तेखार हुसैन के अजाखाने से हजरत इमाम हसन का शबीहे ताबूत बरामद हुआ। इसमें अंजुमन जुल्फकारे हैदरी ने नोहा पढ़ा।
दूसरी ओर, मोहल्ला बाजार में अजाखाना मौलाना नजाहिर हुसैन में हुई मजलिस में मर्सिया मास्टर खुर्शीद अनवर और उनके साथियों ने पढ़ा। मजलिस को मौलाना कंबर अब्बास ने खिताब करते हुए नबी ए करीम के नवासे हजरत इमाम हसन और हजरत इमाम हुसैन के मसाइब बयान किए। कहा कि हजरत इमाम हसन के जनाजे में तीर थे और हजरत इमाम हुसैन का जनाजा तीरों पर था। मजलिस के बाद हजरत इमाम हसन का शबीहे ताबूत निकाला गया। जिसमें बड़ी संख्या में मौजूद अजदारों ने रंजो गम का इजहार किया।
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