जिले भर में शांतिपूर्ण ढंग से दिवाली मनाई गई। घर परिवारों में जाकर एक दूसरे को शुभकामनाएं दी गईं। इसके बाद आतिशबाजी की रंगबिरंगी रोशनी से आकाश सतरंगी नजर आया।
दिवाली के मौके पर घर-घर में लक्ष्मी पूजन किया गया। धन धान्य की प्रार्थना के लिए लक्ष्मी जी के संग विध्नहर्ता गणेश और धनधान्य के भगवान श्री कुबेर की भी पूजा की गई। सुबह से ही घरों में पूजन की तैयारियां की गईं थीं। बच्चों ने आतिशबाजी छुड़ाकर आनंद लिया। घरों को रंग बिरंगी रोशनी और फूलों से सजाया गया। बाजार में देर रात तक भीड़भाड़ का माहौल रहा। रात भर आतिशबाजी छोड़ी गई।
उधर, धनारी में दिवाली पर छात्राओं ने फुलझड़ी छोड़कर त्योहार मनाया। वहीिं युवाओं ने अतिशबाजी छुड़ाई।
आतिशबाजी से आसमान में धुंए के गुबार ः आतिशबाजी के प्रयोग को कम करने के लिहाज से ग्रीन दिवाली का आह्वान किया गया था।
लेकिन दिवाली की रात जागरूकता फैलाने वालों के घरों में ही जमकर आतिशबाजी हुई। संगठनों के संकल्प भी कोरे साबित हुए। दिवाली के मौके पर करीब तीन करोड़ रुपये की आतिशबाजी जिले भर में छोड़ी गई। पूरा आसमान आतिशबाजी के धुएं से पटा दिखाई दिया।
बारुद के धुएं से दिवाली की रात छतों पर खड़े होकर श्वांस लेना भी कुछ लोगों को मुश्किल का सामना करना पड़ा। दीपावली पर जिले भर में शगुन के नाम पर करीब तीन करोड़ रुपये की आतिशबाजी छोड़ी गई। वातावरण में आतिशबाजी से प्रदूषण बढ़ा। हालांकि कुछ लोग ऐसे भी नजर आए जिन्होंने ग्रीन दीपावली मनाई। आतिशबाजी नहीं की।