फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Sambhal News: धर्मवीर के ट्रैक्टर का मैनुअल किया गया था चालान

विज्ञापन
विज्ञापन
मुरादाबाद। खुदकुशी को सर्पदंश बताने में फंसी संभल के कैलादेवी थाने की पुलिस पुराने ढर्रे पर चल रही थी। ई चालान की व्यवस्था लागू होने के बावजूद वाहनों के मैनुअल चालान काटे जा रहे थे। पुलिस की प्रताड़ना से तंग आकर अपनी जान देने वाले धर्मवीर के ट्रैक्टर का चालान भी मैनुअल ही किया गया था।
विज्ञापन

इसकी एक रसीद धर्मवीर के घर से जांच के दौरान एसपी देहात को मिली। शासन के आदेश और अफसरों की लाख सख्ती के बावजूद भी कैलादेवी थाने की पुलिस मैनुअल चालान क्यों कर रही थी। इसका अभी किसी के पास जवाब नहीं है।
करीब दो साल पहले प्रदेश के सभी जिलों में वाहनों के मैनुअल चालान की व्यवस्था बंद कर दी गई थी। इसके बाद ई चालान सिस्टम लागू कर दिया गया था। सभी इंस्पेक्टर और दरोगा व हेड कांस्टेबल को आईडी दी गई थी कि वो एमवी एक्ट में ई चालान कर सकेंगे। सभी थानों,चौकी और यातायात पुलिस से चालान की रसीदे से जमा करा ली गई थीं। बावजूद इसके संभल के कैलादेवी थाने में मैनुअल चालान किया जा रहा था। 23 मई को धर्मवीर के ट्रैक्टर का भी मैनुअल चालान किया गया था। जिस रसीद को काफी समय पहले ही जमा करने के आदेश दिए गए थे। उस रसीद का इस्तेमाल ट्रैक्टर के चालान में क्यों किया गया था। डीआईजी शलभ माथुर ने बताया कि कैला देवी थाने में धर्मवीर के ट्रैक्टर का मैनुअल चालान किया गया था। विभागीय जांच में इस बिंदु पर जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।
विज्ञापन


परिवार की सुपुर्दगी में नहीं सौंपा था धर्मवीर
डीआईजी शलभ माथुर ने बताया कि एसपी देहात की जांच में ये भी बात सामने आई कि कैला देवी थाने की पुलिस धर्मवीर को पकड़कर थाने ले गई थी। उसका ट्रैक्टर भी थाने में खड़ा करा दिया था। रात में पुलिस ने धर्मवीर को थाने से छोड़ दिया था। उसे किसी की सुपुर्दगी में नहीं सौंपा गया है। थाने के रजिस्टर में कही दर्ज नहीं है कि धर्मवीर को किसी की सुपुर्दगी में नहीं सौंपा गया था। इसके अलावा थाना प्रभारी ने उच्च अधिकारियों को छोड़ने से पहले जानकारी नहीं दी थी।
व्हाट्सएप कॉलिंग का जवाब नहीं दे पाए पुलिस कर्मी
एसपी देहात ने पचास से ज्यादा लोगों के बयान दर्ज किए थे। कैलादेवी के थाने में तैनात हेड कांस्टेबल विनेश कुमार और कांस्टेबल अमित कुमार से जब पूछताछ की गई कि उन्होंने धर्मवीर को कॉल क्यों की थी। तब उन्होंने साफ इंकार दिया था लेकिन व्हाट्सएप कॉलिंग की डिटेल से पता चला कि उन्होंने धर्मवीर को कॉल की थी। इसके बाद वह कोई जवाब नहीं दे पाए थे।
विभागीय कार्रवाई में दोषी पाए गए तो होगी संपत्ति की जांच
विभागीय जांच में पुलिस कर्मी दोषी पाए जाएंगे तो उनकी संपत्ति की भी जांच होगी। इससे पहले सभी पुलिस कर्मियों को नोटिस जारी कर जवाब देने का मौका दिया जाएगा। अगर जवाब नहीं दे पाए तो उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। कैलादेवी थाना क्षेत्र के गांव सोभापुर मिलक निवासी धर्मवीर ने खुदकुशी की थी लेकिन पुलिस कर्मियों ने अपनी गर्दन बचाने के लिए परिवार को मुआवजे का लालच देकर सर्पदंश से मौत बताई थी। इस मामले की जांच में थाना प्रभारी समेत चार पुलिस कर्मी में दोषी पाए गए हैं। डीआईजी के आदेश पर सभी को जांच हाजिर कर दिया गया है। डीआईजी ने विभागीय जांच के आदेश भी दिए हैं। एएसपी बिजनौर को जांच सौंपी गई है। पंद्रह दिन में विभागीय जांच पूरी करनी है। अब जांच अधिकारी की ओर से भी पुलिस कर्मियों को नोटिस जारी किया जाएगा। जिसमें सभी पुलिस कर्मियों को आरोपों का जवाब देना होगा। अगर जवाब नहीं दे पाए तो उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। अगर विभागीय जांच में दोषी पाए गए तो संपत्ति की जांच भी हो सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें