नगर में डेंगू अपने पैर पसार चुका है। चंदौसी कोतवाली के एसएसआई पवन कुमार और पूर्व सभासद सहित चार लोगों को डेंगू की पुष्टि हुई है। इनमें से एक मरीज सीएचसी चंदौसी में भर्ती है, अन्य मरीजों का इलाज निजी चिकित्सकों के यहां चल रहा है। चंदौसी सीएचसी में ही जांच से 12 लोगों को डेंगू की जांच की पुष्टि हो चुकी है, निजी लैब से जांच में डेंगू रोगियों की संख्या अलग हैं। जिला अस्पताल सहित अन्य सरकारी अस्पताल में एलाइजा से जांच की सुविधा नही है। मरीजों को मजबूरी में प्राइवेट लैब में जांच के लिए भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। स्वास्थ्य विभाग के पास लैब टेक्नीशियन पर हैं, पर जांच के लिए मरीज उपलब्ध नहीं कराई गई।
चंदौसी के मोहल्ला जारई गेट निवासी नौशाद (35) को चार दिन पहले बुखार आया था। निजी चिकित्सक से उनका उपचार कराया। स्वास्थ्य में सुधार न होने पर बृहस्पतिवार को सीएचसी चंदौसी लाया गया। वहां जांच के दौरान डेंगू की पुष्टि हुई। उनकी प्लेटलेट्स 26000 मिली है। सीएचसी चंदौसी में ही उपचार चल रहा है।, इसके अलावा चंदौसी कोतवाली के एसएसआई पवन कुमार को तीन दिन पहले बुखार आया था। प्राइवेट में जांच कराने पर डेंगू की पुष्टि हुई। उनका चंदौसी में निजी चिकित्सक से उपचार चल रहा है।
इनके अलावा कोतवाली के सिपाही हरिमोहन को भी तीन दिन पहले बुखार आया और जांच में डेंगू की पुष्टि हुई है।, चंदौसी के मोहल्ला चुन्नी निवासी पूर्व सभासद बीना देवी (45) को तीन दिन पहले बुखार आया था। स्थानीय स्तर पर जांच कराई गई। जांच में उन्हें डेंगू की पुष्टि हुई। इसके बाद उपचार के लिए परिजनों ने उन्हें मुरादाबाद के निजी अस्पताल में भर्ती कराया है।
एक जिला अस्पताल, नौ सीएचसी पर एलाइजा से जांच की नहीं सुविधा:
जिले में एक जिला अस्पताल व नौ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। डेंगू की जांच के लिए एनएस-1 की जांच की जाती है।डेंगू की जांच दो तरीके (रैपिड किट व एलाइजा) से होती है। एलाइजा से संख्यात्मक जांच होती है तथा वही विश्वनीय जांच है। रैपिड किट से जांच ज्यादा विश्वसनीय नहीं मानी जाती है। हैरानी की बात यह है कि एलाइजा की जांच के लिए उपकरण भी पांच लाख रुपय से सात लाख रुपये तक में उपलब्ध हो जाती है। विभाग के पास जिला अस्पताल व सीएचसी में जांच के लिए लैब टेक्नीशियन उपलब्ध हैं, पर विभाग मशीन व उपकरण उपलब्ध नहीं करा पाया। मजबूरी में मरीजों को प्राइवेट लैब में 600 रुपये से 850 रुपये तक में एलाइजा से डेंगू की जांच करानी पड़ रही है।
जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में रैपिड किट से जांच की जा रही है। जिले में तीन प्राइवेट लैब ही एलाइजा से जांच करनीे के लिए अधिकृत हैं। इनके अलावा अधिकांश लैब रैपिड किट से कर रही है। हैरानी की बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग स्वयं ही किट से जांच कर रहा है और प्राइवेट लैब की किट से जांच को दरकिनार कर रहा है। इस कारण निजी लैब से जांच में डेंगू रोगियों की पुष्टि की संख्या को आंकड़ों में दर्ज नहीं करता।
विभाग से जुड़े एक व्यक्ति ने बताया कि रैपिड किट से डेंगू की जांच में बमुश्किल दो से तीन मिनट का समय लगता है। जबकि एलाइजा से जांच के लिए सैंपल को 45 मिनट से एक घंटे तक मशीन में रखना पड़ता है। इस कारण अधिकांश प्राइवेट लैब, सरकारी लैब भी एलाइजा से जांच करने से बचते हैं।
जिले के सरकारी अस्पतालों में रैपिड किट से ही जांच की सुविधा है। एलाइजा से जांच नहीं होती है। इसके लिए जल्द ही शासन को मशीन व उपकरण उपलब्ध कराने के लिए लिखा जाएगा। अधिकृत प्राइवेट लैब की जांचों को भी वरीयता दी जा रही है। उनके आंकड़े भी मंगवाकर सूची में शामिल किए जाएंगे।-डॉ. तरन्नुम रजा, सीएमओ संभल