संभल। भारतीय किसान यूनियन (शिक्षक प्रकोष्ठ) के बैनर तले शिक्षकों ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन भाजपा जिलाध्यक्ष हरेंद्र सिंह को सौंपा। कहा कि सुप्रीम कोर्ट के कक्षा एक से आठ तक शिक्षण करने वाले शिक्षकाें के लिए टीईटी अनिवार्य करने के आदेश से उनके व परिवार के सामने नौकरी जाने का संकट खड़ा हो गया है। वक्ताओं ने मांग की है कि सरकार शिक्षकों के हित को देखते हुए इसका समाधान निकाले।
यूनियन के जिलाध्यक्ष रुकमेश चाहल सर्वोच्च न्यायालय ने कक्षा एक से आठ तक शिक्षण कार्य करने वाले शिक्षकों को आगामी दो वर्षों में शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण न करने पर अनिवार्य सेवानिवृत्ति देकर सेवा से बाहर किए जाने संबंधी आदेश किया है। इस आदेश से पूरे देश के लगभग 15 लाख तथा उत्तर प्रदेश में चार लाख शिक्षक प्रभावित हैं। वह अपनी सेवा खो देने के डर से भयभीत हैं। आदेश से शिक्षकों व उनके परिवारों के जीवन पर संकट हो गया है।
कहा कि अध्यापक शिक्षा परिषद द्वारा भारत के राजपत्र में कक्षा एक से आठ तक शिक्षक के रूप में नियुक्ति के लिए न्यूनतम योग्यता निर्धारित करने के संबंध में अधिसूचना जारी की गई थी। इसके बिंदु चार के अनुसार इस अधिसूचना की तिथि से पूर्व कक्षा एक से आठ तक शिक्षण के लिए नियुक्त सभी शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा से मुक्त रखा गया है।
23 अगस्त 2010 के बाद की भर्ती पर ही शिक्षक पात्रता परीक्षा को लागू किया गया है। मुख्यमंत्री से मांग की कि प्रदेश के शिक्षकों और उनके परिवारों पर आए संकट के संबंध में वार्ता कर समाधान कराया जाए। शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा से मुक्त रखा जाए। इस दौरान जिलाध्यक्ष रुकमेश चाहल, महामंत्री मोहम्मद उमर, वीरेंद्र सिंह, हरेंद्र सिंह, प्रदीप, पंचम सिंह, कमल सिंह, विवेक, अमरीश कुमार आदि रहे।