41 लाख वर्ग फुट में बने शामियाने में पश्चिम से लेकर पूरब तक की तब्लीगी जमातें ठहरी हैं। भले ही इन जमातों के जिले अलग-अलग हों, लेकिन सबका मकसद एक ही है। पैगाम-ए-नबी को घर-घर पहुंचाना। यूपी के अलावा दूसरे राज्यों से भी तब्लीगी जमातें इज्तिमा में पहुंची हैं।
संभल में चल रहे तीन दिनी इज्तिमा में आई तब्लीगी जमात के लिए 41 लाख वर्ग फुट में एक बड़ा सा शामियाना बनाया गया है। इस शामियाने में हर जिले के नाम से अलग-अलग हल्के बनाए गए। इस हल्के में तब्लीगी जमात रुकी हुई हैं। इस शामियाने के नीचे पूरब से लेकर पश्चिम तक की जमातें हैं। जहां दीनी की बातों के साथ पांचों वक्त की नमाज अदा की जा रही है। जमातें दीनी बातों पर एक दूसरे से रूबरू हो रही हैं। इज्तिमा में वेस्ट यूपी से रामपुर, बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद, मेरठ, मुजफ्फरनगर, अमरोहा, सहारनपुर सहित अन्य जिले हैं तो ईस्ट यूपी से गोरखपुर, देवरिया, बस्ती, मऊ, आजमगढ़, फैजाबाद, गोंडा, बनारस, इलाहाबाद की तब्लीगी जमाते हैं। वैसे तो ये इज्तिमा यूपी का है, लेकिन दिल्ली, पंजाब, उत्तराखंड, बिहार प्रदेश की भी जमातों ने भी इज्तिमा में शिरकत किया है।
जरूरतों को सीमित रखो, जरूरतमंद की मदद करो
संभल। मौलाना शौकत ने पांडाल में मौजूद हिंदुओं और मुसलमानों से मुखातिब होते हुए कहा कि नबी-ए-करीम की तालीम यही है कि अपनी जरूरतों को सीमित रखो और जो भी धन संपत्ति है, उसके जरिए से हर समय जरूरतमंद की मदद करो। मौजूद लोगों को अपनी तकरीर से गरीबों की मदद के लिए प्रेरित किया। साथ ही पड़ोसी का ख्याल रखने की नसीहत की।
लाखों लोग जुटे पर नहीं दिखी आपाधापी
दीनी इज्तिमा पांच किलोमीटर से ज्यादा एरिया में फैला हुआ है। इस एरिया में जहां शुक्रवार से ही लोग पहुंचने लगे थे और शनिवार होते होते यहां पर लाखों की भीड़ हो गई। लेकिन सबसे अहम बात यह थी कि इज्तिमा का इंतजाम इस तरह से था कि किसी को कोई मुश्किल नहीं हो रही थी। न तो कहीं ट्रैफिक का जाम था। न ही कोई भूखा और परेशान था।
हजारों बसों और छोटे वाहनों की पार्किंग बड़े सलीके से अलग-अलग स्थानों पर की गई थी।
किसी को परेशानी न आए इसके लिए ट्रैफिक डायवर्जन था और इसका मैप तो आयोजकों ने बहुत पहले ही बना लिया था। मैप पर अमल के लिए इज्तिमा के आयोजकों की ओर से ही तब्लीगी जमातों के साथ दीगर मुसलमान भी लगे थे। अहम बात यह भी थी अमीर और गरीब सभी ने अपना-अपना योगदान दिया लेकिन किसी ने बदले में कुछ नहीं लिया।
लगभग दो हजार लोग दो महीने से लगे थे लेकिन किसी ने अपना मेहनताना नहीं लिया। लेने की बात तो छोड़िए कोई इसके बारे में सोच भी नहीं रहा था। जिससे भी पूछा- उसने यही जवाब दिया, भाई दीन का काम करके अल्लाह को राजी करना है। सब कुछ खुद-ब-खुद हासिल हो जाएगा।