चंदौसी(संभल)। चार दिन से लापता सीएचसी में तैनात फार्मासिस्ट का सड़ा-गला शव परिसर स्थित खाली सरकारी क्वार्टर में मिला। क्वार्टर का दरवाजा अंदर से बंद था। बदबू आने पर सूचना मिलने पर पुलिस ने दीवार तोड़कर दरवाजा खुलवाया। फोरेंसिक टीम ने मौके से नमूने लिए। प्रथमदृष्टया मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है, हालांकि मौत का कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट से स्पष्ट होगा।
उत्तराखंड के रानीखेत के निरकोट निवासी मोहन पाठक 2012 में बनियाठेर के अकरौली पीएचसी में फार्मासिस्ट थे और 2014 से सीएचसी चंदौसी में तैनात थे। वह यहीं एक सरकारी क्वार्टर में परिवार के साथ रहते थे। उनकी पत्नी हेमा पाठक भी सीएचसी में फार्मासिस्ट हैं।
14 अप्रैल से मोहन पाठक लापता थे और उनका मोबाइल भी बंद था। बृहस्पतिवार को बड़े भाई विजय पाठक के आने पर पत्नी ने कोतवाली में गुमशुदगी दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस तलाश में जुटी थी।
शुक्रवार दोपहर सीएचसी परिसर के एक खाली क्वार्टर से बदबू आने पर स्टाफ ने सीएमएस डॉ. हरवेंद्र सिंह को सूचना दी। गेट अंदर से बंद होने पर कोतवाल अनुज कुमार तोमर मौके पर पहुंचे और दीवार तुड़वाकर दरवाजा खुलवाया। अंदर लोहे के बेड के नीचे शव पड़ा मिला, जो काफी फूल चुका था। पास में गद्दा और उनके सैंडिल पड़े थे, जिनसे पत्नी ने शव की पहचान मोहन पाठक के रूप में की।
फॉरेंसिक टीम ने मौके से साक्ष्य जुटाए और पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मृतक के बड़े भाई विजय पाठक के अनुसार मोहन पाठक को लंबे समय से ऑनलाइन गेमिंग (सट्टा) की लत थी और वह तनाव में रहते थे। कोतवाल अनुज कुमार तोमर ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत का सही कारण स्पष्ट होगा।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
फार्मासिस्ट मोहन पाठक की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। शव देख कर पत्नी हेमा पाठक व बड़े भाई विजय पाठक बिलख पड़े। बड़े भाई विजय पाठक ने बताया कि बताया कि वह तीन भाइयों में सबसे छोटे थे। मझले भाई नवीन पाठक हल्द्वानी में हैं। मोहन पाठक के दो बेटे अंश पाठक और वंश पाठक हैं। अंश पाठक पौड़ी गढ़वाल के श्रीनगर गढ़वाल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस की ट्रेनिंग कर रहे हैं, जबकि छोटा बेटा वंश देहरादून से बीटेक कर रहा है।
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तीन बार कैंसर की सर्जरी हो चुकी थी
फार्मासिस्ट मोहन पाठक कैंसर पीड़ित थे। बड़े भाई विजय पाठक ने बताया कि मोहन पाठक की तीन बार सर्जरी हो चुकी है। जिससे वह खाना भी नहीं खा पाते थे। सिरिंज से तरल पदार्थ का सेवन करते थे। उन्हें कैंसर 2013 में हुआ था।