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Sambhal News: चकबंदी और राजस्व न्यायालयों में मिल रही तारीख पर तारीख

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संभल। जिले में तमाम ऐसे पीड़ित हैं, जिन्हें न्याय नहीं, सिर्फ तारीख मिल रही है। राजस्व के मामले हों, या फिर चकबंदी। सभी में देरी है और न्याय नहीं मिल रहा। चकबंदी विभाग में ही 1600 से अधिक ऐसे मामले लंबित हैं, जिनमें न्याय होना है।
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संभल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रदीप कुमार गुप्ता का कहना है कि चकबंदी प्रक्रिया की धीमी रफ्तार के पीछे मुख्य कारण अधिकारी और कर्मचारियों की कमी है। बताया कि उप संचालक चकबंदी (डीडीसी) सुरेश चंद्र जायसवाल 31 जुलाई को सेवानिवृत्त हो गए। उनके बाद से किसी अधिकारी की तैनाती नहीं हो सकी। वहीं, बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी (एसओसी) मातवर सिंह का स्थानांतरण उन्नाव हो गया था। उनके स्थानांतरण के बाद गाजियाबाद के एसओसी को जिले का अतिरिक्त चार्ज दिया गया लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है।
उप संचालक चकबंदी (डीडीसी) का चार्ज जिले में जिले के आला अफसर के पास है लेकिन सुनवाई शून्य जैसी है। इसी तरह एसओसी का चार्ज तहसीलदार धीरेंद्र कुमार सिंह के पास हैं। उनके स्तर से भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। इस कारण तमाम वाद लंबित हैं और वादकारियों व किसानों को तारीख ही मिल रही है।
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32 गांवों में प्रचलित है चकबंदी प्रक्रिया

वर्तमान समय में संभल जिले के 32 गांवों में चकबंदी की प्रक्रिया प्रचलित है। कई स्थानों पर वर्ष 2002 से लेकर अब तक पैमाइश की त्रुटियां और रिकॉर्ड की गड़बड़ियां सुधर नहीं सकी हैं। इसके अलावा 27 गांव ऐसे भी हैं, जहां यह प्रक्रिया दस वर्ष से अधिक समय से अधूरी है। यही नहीं, कुछेक गांवों में दो दशक बीतने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ है। संवाद
जिले में चकबंदी विभाग में अधिकारियों की तैनाती के लिए चार बार शासन को पत्राचार किया है। लेकिन अब तक कोई तैनाती नहीं हो सकी है। इसका खामियाजा वादकारियों और किसानों को ही उठाना पड़ रहा है। उन्हें न्याय नहीं मिल रहा है।
प्रदीप कुमार गुप्ता, संभल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष।
चकबंदी में न्याय न मिलने और तारीखें पड़ने की समस्या आम हो गई है। अधिकारियों की कमी और प्रक्रिया में देरी इसका मुख्य कारण है। इसका समाधान मिलना चाहिए, ताकि वादकारियों और किसानों को समस्याएं न झेलनी पड़ें।
राजेंद्र सिंह सैनी, डिस्ट्रिक्ट सीनियर बार एसोसिएशन एवं लाइब्रेरी, संभल के अध्यक्ष।
यह बोले वादकारी
दो साल पहले चकबंदी हुई थी। इस प्रक्रिया में लगी टीम ने सांठगांठ करके उनके चक को सड़क से पीछे हटा दिया। एसओसी के यहां अपील की लेकिन न्याय न मिला। अब डीडीसी के यहां अपील की। उम्मीद है कि जल्द न्याय मिलेगा, लेकिन फिलहाल तारीख पर तारीख मिल रही है।
सोहनलाल, खजरा खाकम, बहजोई।
हमारे चक गलत हैं। इन्हें सही कराने के लिए डीडीसी के यहां वाद लंबित है। एक साल बीत गया लेकिन न्याय न मिला। शुक्रवार को यानी आज फिर तारीख है। उम्मीद है कि न्याय मिल जाएगा।
-रामकिशोर, पवांसा
उड़ान चक बनाकर दूसरे स्थान पर भूमि दी गई। ढाई साल हो गए इंसाफ के लिए लड़ रहे हैं लेकिन न्याय नहीं मिल रहा। सिर्फ और सिर्फ तारीख मिल रही है। कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।
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-हरनारायण, गांव कैलमुंडी का मझरा पतौंजा
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