सियासी दबाव कहें या अधिकारियों की ढिलाई लेकिन हकीकत यह है कि देवेंद्र सिंह यादव शिकायतों के बाद भी हयातनगर थाने में तैनाती पाते रहे। उनकी कमियों पर पर्दा पड़ता रहा। अपनी तैनाती के दौरान वह हमेशा चर्चा और विवादों में रहे। अब सवाल यह है कि इसके बावजूद उन्हें बार-बार हयातनगर थाने में ही तैनाती क्यों मिलती रही।
इस बारे में अधिकृत तौर पर कोई कुछ कहने को तैयार नहीं है लेकिन ऐसा कहा जाता है कि राजनीतिक दबाव में उन्हें बार बार तैनाती मिली थी। यही वजह रही कि जो शिकायतें उनके खिलाफ सामने आती थीं।उनको अधिकारी नजर अंदाज कर जाते थे। मालखाने और मुकदमों से संबंधित का माल का हकीकत में मिलान भी नहीं हुआ। इसका खुलासा तब हुआ जब उनके तबादले के बाद हेड मोहर्रिर पद पर नवरत्न की तैनाती हुई। उन्होंने देवेंद्र सिंह यादव से पिछला चार्ज मांगा।
चार्ज देने में आनाकानी सामने आई तो मौजूदा एसपी ने वरिष्ठ अधिकारियों की कमेटी बनाई। कमेटी ने उनकी तैनाती के दौरान के अभिलेखों का परीक्षण किया और माल मुकदमों का मिलान कराया। इसमें कीमती सामान, छह कारों और एक ट्रैक्टर समेत 28 वाहन गायब मिले।गायब माल की कीमत दस लाख रुपये से अधिक आंकी गई।