चंदौसी/कुढ़फतेहगढ़। अरुणाचल प्रदेश में चीन की सीमा पर कर्तव्य पालन के दौरान शहीद आईटीबीपी के जवान प्रदीप कुमार यादव का तिरंगे में लिपटा शव रविवार की सुबह उनके गांव चितौरा में जब अंतिम दर्शन के लिए रखा गया तो हर आंख नम थी। राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।
संभल जिले के चितौरा गांव निवासी नंदराम सिंह के बेटे प्रदीप कुमार यादव (35) अरुणाचल प्रदेश में चीन की सीमा चिमंगाथन चौकी पर तैनात थे और पेट्रोलिंग के दौरान पानी की पाइप लाइन सही करते समय पैर फिसल जाने से खाई में गिर गए थे। उपचार के दौरान उनकी जान चली गई। आईटीबीपी के जवान अपनी गाड़ी से तिरंगे में लिपटा शहीद जवान का शव लेकर रविवार की सुबह छह बजे चितौरा पहुंचे। तब तक सैकड़ों लोग शहीद के अंतिम दर्शन के लिए एकत्र हो गए थे। शहीद के पार्थिव शरीर को सभी के दर्शन के लिए घर के बाहर बरामदे में रखा गया।
ग्रामीणों, सगे संबंधियों, राजनेताओं तथा आसपास से आए हजारों लोगों ने शहीद के पार्थिव शरीर के दर्शन किए। राज्यमंत्री गुलाब देवी, जिलाधिकारी संजीव रंजन, पुलिस अधीक्षक चक्रेश मिश्र ने पुष्प अर्पित किए। श्रद्धांजलि दी। शहीद हुए प्रदीप यादव के बड़े भाई प्रमोद कुमार यादव ने शहीद प्रदीप के बेटे अक्षांश का हाथ लगवा कर मुखाग्नि दी।
मुखाग्नि के समय आईटीबीपी के जवानों ने सम्मान के साथ सलामी दी। शहीद की अंतिम यात्रा से पहले जनप्रतिनिधियों और नेताओं तथा अधिकारियों ने शहीद और उनके परिवार के प्रति सम्मान व्यक्त किया। भाजपा से क्षेत्रीय उपाध्यक्ष राजेश सिंघल, भारत सिंह यादव, नीलेश यादव, लवली यादव उर्फ विश्वास यादव, सुमित कुमार, श्रीपाल दिवाकर, आरएसएस से संजीव कुमार सपा से जिला अध्यक्ष असगर अली अंसारी, महासचिव कृष्ण मुरारी शंखधार, सतीश प्रेमी एवं कांग्रेस से कल्पना सिंह आदि पहुंचे। पुष्प चढ़ाकर नमन करते हुए श्रद्धांजलि दी।
नहीं थी अरुणाचल प्रदेश में जाने की इच्छा
चंदौसी। प्रदीप यादव की तैनाती सात महीने पहले अरुणाचल प्रदेश में चीन की सीमा पर की गई थी। तैनाती होने के बाद वह छुट्टियां बिताने नवंबर में अपने घर आ गए। अरुणाचल प्रदेश अधिक दूर होने के कारण उनकी इच्छा ड्यूटी करने की नहीं थी। प्रदीप यादव के भांजे रिंकू यादव ने बताया कि जब नवंबर में छुट्टियां बिताने घर आए थे तो वह कहते थे कि मेरी इच्छा अरुणाचल प्रदेश में जाकर नौकरी करने की नहीं है। इसे लेकर चाहे मुझे नौकरी छोड़नी पड़ जाए लेकिन परिजनों के समझाने पर वह ड्यूटी करने चले गए। तब से अब तक वह वहीं चीन की सीमा पर ड्यूटी कर रहे थे।
चाचा को प्रदीप की शहादत पर गर्व, बच्चों को भी सेना में भेजने काइरादा
शहीद प्रदीप कुमार यादव के चाचा करन सिंह ने कहा कि प्रदीप यादव समेत परिवार में चार लोग सुरक्षा बलों में भर्ती हुए। इनमें से प्रदीप कुमार देश की सेवा करते हुए शहीद हो गए। देश की सेवा कर रहे प्रदीप यादव की शहादत पर हमें गर्व है क्योंकि देश के लिए कर्तव्य पालन में प्रदीप शहीद हुआ है। भविष्य में भी मैं अपने परिवार के बच्चों को सेना में देश की सेवा के लिए भेजूंगा।
चंदौसी-भूड़ बिसौली मार्ग का नामकरण शहीद के नाम पर होगा
चंदौसी। राज्यमंत्री गुलाब देवी ने बताया कि चंदौसी से रहोली और चितौरा होते हुए भूड़ बिसौली गांव तक गई सड़क का नामकरण अब शहीद के नाम पर होगा। सड़क निर्माणाधीन है और अब यह सड़क शहीद के नाम से ही जानी जाएगी। ब्यूरो
पत्नी बोली- साहब जी सो रहे हैं, अभी उठेंगे
चंदौसी। पत्नी अनीता की आंखें नम हैं। पति का शव घर के बाहर रखा है। यह दृश्य चितौरा में शहीद प्रदीप कुमार यादव के घर के बाहर का है। तमाम लोग उनके पति की शहादत को नमन कर रहे थे पर अनीता को लग रहा था कि पति फिर से परिवार में आएंगे। इसी दौरान जब बेटा अक्षांश उनसे पूछता है कि पापा कब ठीक होंगे तो पत्नी कहती है- साहब जी अभी सो रहे हैं। अभी ठीक हो जाएंगे और उठेंगे तथा हमारे बीच आएंगे।