संभल भी कभी सिमी का गढ़ रहा है। यहां स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट आफ इंडिया (सिमी) की बैठकें हुआ करती थीं। कई लोग सिमी के लिए काम करते थे, जो प्रतिबंध के बाद अलग-अलग संगठनों में सक्रिय हो गए हैं।
संभल में चार वर्ष तक सिमी का नेटवर्क सक्रिय रहा। संभल से अलीगढ़, मुरादाबाद और दिल्ली तक सिमी पदाधिकारियों के तार जुड़े हुए थे। सिमी के सक्रिय सदस्य उस वक्त बैठकें किया करते थे। जब प्रतिबंध लगा तब सिमी के सक्रिय गुर्गों की तलाश में छापेमारी हुई। पदाधिकारी भूमिगत हो गए। उसके बाद अलग-अलग संगठनों में शामिल हो गए। उस समय के नेटवर्क का ब्योरा लेने के बाद मौजूदा हालात क्या हैं? इस पर खुफिया तंत्र अब जानकारी जुटा रहा है।
संभल आतंकी कनेक्शन और सांप्रदायिक दृष्टिकोण से संवेदनशील है। सिमी के साथ संपर्क रखने के आरोप में 1999 से 2003 के बीच कुछ लोगों को उठाया गया था। लेकिन साक्ष्य के अभाव में उन्हें छोड़ दिया गया था। भोपाल में सिमी के आठ आंतकी पकड़े जाने के बाद एक बार फिर खुफिया तंत्र उन स्थानों पर फोकस कर रहा है, जहां पर सिमी का नेटवर्क रहा है। सिमी के नेटवर्क से जुड़े रहे लोगों के बारे में फीडबैक लिया जा रहा है।
इसमें संभल भी खुफिया एजेंसियों के रडार पर है। संभल से आतंकी नेटवर्क अलकायदा का नाम भी जुड़ा है। यहां पर वर्ष 2015 में अलकायदा नेटवर्क से संपर्क रखने वाले मोहम्मद आसिफ और जफर मसूद को गिरफ्तार किया जा चुका है। दिल्ली पुलिस की एसटीएफ ने दोनों को दिसंबर 2015 में गिरफ्तार किया था। दिल्ली पुलिस के मुताबिक मोहम्मद आसिफ अलकायदा का इंडिया चीफ है। जफर मसूद और मोहम्मद आसिफ दिल्ली की तिहाड़ जेल में हैं।
संभल में सिमी का नेटवर्क रहा है लेकिन कई वर्षोे से कोई सक्रियता सामने नहीं आई है। फिर भी एहतियाती तौर पर पुलिस तथा प्रशासन सतर्क है। भोपाल की घटना के बाद स्थानीय अभिसूचना इकाई को जानकारी जुटाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। संभल में कहां नेटवर्क रहा है। इसे खंगाला जा रहा है। कहीं कोई संदिग्धता मिलती है तो कार्रवाई की जाएगी।
- बालेंदु भूषण, पुलिस अधीक्षक।
संभल। सिमी से संबंधित केवल इतनी जानकारी जिला खुफिया विभाग के पास है कि ही चार साल संभल क्षेत्र में सिमी का नेटवर्क रहा है। कुछ लोगों को उठाया गया। साक्ष्य के अभाव में छोड़ दिया गया। खुफिया तंत्र खुद ये मानता है कि सिमी पर प्रतिबंध के बाद संभल में नेटवर्क खड़ा करने वाले लोग दूसरे संगठनों में सक्रिय हो गए। लेकिन उनकी कोई जानकारी उसके पास नहीं है। इससे ज्यादा जानकारियों के लिए वह मुरादाबाद मुख्यालय की ओर मुंह बाए खड़ा है। सुरक्षा तंत्र की इस लचर कार्यशैली से उसकी सक्रियता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
सिमी पर बेशक 2006 में प्रतिबंध लगा दिया गया। लेकिन आगरा जोन में उसके सक्रिय होने का दावा अब भी खुफिया तंत्र कर रहा है। अप्रैल 1977 में अलीगढ़ में शुरू हुए इस नेटवर्क की जड़ें पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सबसे मजबूत मानी जाती रही हैं। सिमी के नेटवर्क और स्लीपर सेल की जानकारी जुटाई जा रही है।