मौलागढ़ तिराहे पर चल रहे मानव मिलन सद्भावना समागम में अध्यात्मिक प्रवचन करते करते हुए साकार विश्व हरि ने कहाकि धर्म जोड़ता है, कभी तोड़ता नहीं है। धर्म की आड़ में अंध विश्वास, ढोंग, पाखंड का बोलबाला हो गया है, स्वयं का कर्म ही पाप बन जाता है। इसलिए मानवता की परिधि में रहकर मानवतावादी कर्म करने चाहिए।
समागम के सातवें दिन की शुरुआत साकार विश्वहरि की वंदना से हुई। प्रवचन करते साकार विश्व हरि ने कहाकि मानव धर्म ही सबसे बड़ा धर्म है, यह हमेशा था, है और रहेगा। मानव को मानवता की परिधि को कभी नहीं लांघना नहीं चाहिए। खाना सोना कर्म करना यह सभी मनुष्य से नित्य कर्म है।
संसार में बहुत बलशाली व्यक्ति हैं, लेकिन जब शरीर से प्राण वायु निकलती है तो कोई भी परिवारजन, मित्रजन साथ नहीं देता। सिर्फ स्वयं का कर्म ही साथ देता है। समाज को जोड़ना साकार विश्व हरि का अभियान है, इसमें साथ दिया तो यही कर्म आपकी पूजा बन जाएगा।
यहां आने वाली आत्माओं को छोटा बड़ा, ऊंच नीच की दृष्टि से नहीं देखा जाता है। ब्रह्म के दरबार सभी आत्मा बराबर हैं। आपका शरीर ही पूजा घर है, निस्वार्थ प्रेम करो, सच्चाई का साथ दो। इसमें रमेशचंद्र, यादराम, क्रांति देवी, राजरानी देवी, सर्वेश देवी, गायत्री देवी, वेदप्रकाश, पप्पू सिंह, सुरेश गौतम, विपिन, राजाराम, हुकुम सिंह, राजा बाबू, शिव अवतार गुप्ता, राजेंद्र सिंह, मित्रपाल सिंह, विलौटा सिंह, अशोक कुमार, शेर सिंह आदि का सहयोग रहा।