चंदौसी के अकरौली क्षेत्र में उड़द की गहाई करते किसान।
मौसम की मार ने उड़द की फसल को बेहाल कर दिया। उत्पादन में भारी गिरावट देखने को मिल रही। जिन खेतों में उड़द की फसल 50 से 70 किलो प्रति बीघा निकलती थी, उन खेतों में अब 25 से 30 किलो तक ही निकल रही है। जिससे किसानों के होश उड गए हैं। रही सही कसर बाजार ने पूरी कर दी है। 2016 में 6000 रुपये, 2015 में 12000 रुपये क्विंटल बिकने वाली फसल आज 2800 से 3000 रुपये प्रति क्विंटल खरीदी जा रही है।
उड़द की पैदावार व भावों में तेजी को देखकर ही किसान उड़द की ओर आकर्षित हुआ था लेकिन इस बार उड़द ने किसान को धोखा दे दिया है। इन दिनों उड़द की फसल तैयार है, उसकी कटाई और गहाई की जा रही है, लेकिन जो पैदावार निकल रही है, उसे देखकर किसानों की पेसानी पर बल पड़ गए हैं। खेतों में सिर्फ 25 से 30 किलो प्रति बीघा उड़द निकल रहा है। जबकि पिछले साल की अपेक्षा यह उत्पादन आधे से भी कम है। इसके पीछे विपरीत मौसम बताया जा रहा है। किसानों का मानना है कि उड़द की फसल के अनुकूल मौसम नहीं रहा। अधिक बारिश व बिजली की चमक के कारण उड़द का फूल खराब हो जाने के कारण फसल की पैदावार प्रभावित हुई।
आलम यह है कि फसल की लागत निकलना मुश्किल हो रही है। एक बीघा खेत में करीब हजार रुपये की लागत लग रही है जबकि पैदावार 25 से 30 किलो ग्राम प्रति बीघा हो रही है, जिससे किसान को बमुश्किल नौ सौ रुपये ही मिल रहे हैं। यानी प्रति बीघा लागत में भी 11 सौ रुपये तक का घाटा हो रहा है। उड़द की फसल में किसान दो तरफा मार झेल रहा है। कम पैदावार के बाद बाजार में उड़द का उचित भाव ने मिलने से किसान को लागत हाथ नहीं आ रही है। इससे उसके माथे पर चिंता की लकीरे पड़ रही है।