दिवाली का त्योहार रोशनी का त्योहार है। कौन नहीं जानता कि पटाखों के तेज धमाकों से सबको दिक्कत आती है। वहीं अत्याधिक पटाखे छोड़ने पर प्रदूषण फैलता है और त्योहार की मूल मंशा पीछे छूट जाती है। हर चेहरे तक खुशी आए। हर कोई त्योहार में मनाए।
तभी इस मौके की सार्थकता है लेकिन कुछ लोग अपनी खुशी के लिए दूसरे की खुशियों का ध्यान नहीं रखते हैं। मसलन पड़ोसी बीमार है तो भी हमें कोई परवाह नहीं है। हम पटाखों की लड़ी में आग लगाने में मशगूल रहते हैं और बीच बीच में तेज आवाज पटाखे भी छुड़ाते हैं।
पड़ोसी बीमार और बुजुर्ग परेशान है क्या हमारी जिम्मेदारी उनके प्रति नहीं है? इस सवाल को उठाते हुए शिक्षकों तथा चिकित्सकों ने कुछ सावधानियां गिनाईं और संवेदनशीलता बरतने का संदेश दिया है।