हयातनगर थाना क्षेत्र के एक गांव में किसान परिवार की 17 वर्षीय बेटी घर में रहकर 12 वीं कक्षा में प्राइवेट स्कूल में पढ़ाई कर रही थी। घरेलू कामकाज को लेकर मां ने उसे शुक्रवार को शाम डांट दिया। छात्रा इससे क्षुब्ध हो गई। रात में वह मां के साथ घेर में सो गई और पिता घर के बाहर स्थित दुकान में सो गए। रात में किसी समय छात्रा कमरे में पहुंची और खुद को फांसी लगा ली। सुबह पांच बजे परिजनों ने उसे देखा। फंदे को खोला और आसपास के लोग भी आ गए।
...तो बच्चे नहीं उठाएंगे आत्मघाती कदम
संभल(ब्यूरो)। बदलते दौर में बच्चों की समझदारी बढ़ गई है। अब पहले जैसा नहीं है। तमाम प्रचार माध्यम और समाज उन्हें प्रभावित करता है। इंटरनेट के इस दौर में अभिभावकों की भी जिम्मेदारी है कि वे अपने बच्चों को भावनात्मक तरीके से समझें। उनके साथ पर्याप्त संवाद बनाएं रखें। आमतौर पर बच्चे अपनी दुनिया में रहते हैं। अभिभावक अपने-अपने काम में व्यस्त रहते हैं। जिन परिवारों में बच्चों के साथ अभिभावकों का संवाद कम हो जाता है वहां पर बच्चे तनाव का शिकार हो रहे हैं।
जिन परिवारों में अभिभावकों और बच्चों के बीच बातचीत खूब होती है, उन परिवारों के बच्चे अपना तनाव बातचीत के दौरान ही खत्म कर लेते हैं। वह आत्मघाती कदम उठाने की ओर नहीं बढ़ते। बच्चों के मामले में अधिक से संवाद बनाए रखें। ( एसएम कालेज के शिक्षक डा. पवन यादव से बातचीत के आधार पर )
इन बातों का रखें ध्यान
a घर में अगर एक से अधिक बच्चे हैं तो सबको समान रूप से प्यार करें a बच्चों में एक दूसरे के प्रति होड़ पैदा न करें a लगातार किसी एक बच्चे को डांटेंगे तो हो सकता है कि वह जिद्दी हो जाए a बच्चों को उनके मिजाज और समझदारी के साथ आगे बढ़ाएं।
(चिकित्सक डा. नीरज शर्मा से बातचीत के आधार पर )