जो जैसा करता है, उसे उसका फल अवश्य भोगना पड़ता है। इसी लिए हमें हर किसी के साथ अच्छा ही करना चाहिए। यह विचार कथाव्यास रामवल्लभाधीश ने भागवत में व्यक्त किए।
सीता रोड स्थित गीता सत्संग भवन में आयोजित भागवत कथा के अंतिम दिन राम बल्लभाधीष ने कहाकि सुदामा कृष्ण की दोस्ती बेमिसाल है। दोस्ती सुदामा कृष्ण जैसी होनी चाहिए। आज की दोस्ती अधिकतर स्वार्थवश की जाती है। सुदामा संदीपन गुरु के आश्रम में शिक्षा ग्रहण करने के दौरान भगवान कृष्ण के हिस्से के चावल खाये तो उन्हें दरिद्रता प्राप्त हुई।
लेकिन दुख के समय में सुदामा को दोस्त की याद आई तो जहां पहुुंचे द्वारिकापुरी। कान्हा ने दोस्ती का फर्ज अदा किया। और दो लोको का स्वामी बना दिया। कथा में प्रदीप वार्ष्णेय, पिंकल कुमार, रीता वार्ष्णेय, चंदन गुप्ता आदि ने सहयोग किया।