सपा नेता और पूर्व सांसद डा. शफीकुर्रहमान बर्क ने नरेंद्र मोदी की सरकार को निशाने पर लिया। एएमयू और जामिया यूनिवर्सिटी के अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान होने के सवाल पर शुक्रवार को उन्होंने अपनी बेबाक राय प्रस्तुत की।
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की स्थापना से लेकर अब तक के सफरनामे का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अगर इस यूनिवर्सिटी के अल्पसंख्यक स्वरूप से छेड़छाड़ की गई तो अच्छा नहीं होगा। देश में अल्पसंख्यकों की पढ़ाई प्रभावित होगी। इसकी जिम्मेदार केंद्र सरकार होगी। उन्होंने कहा कि देश में 470 यूनिवर्सिटी हैं।
मुस्लिमों की सिर्फ दो ही यूनिवर्सिटी हैं लेकिन अब इनका अल्पसंख्यक होने का दर्जा छीना जा रहा है। जबकि मुस्लिम आबादी को देखते हुए 70 यूनिवर्सिटियों को अल्पसंख्यक संस्थान होने का दर्जा दिया जाना चाहिए, ताकि मुस्लिम वर्ग के लोग आसानी से तालीम हासिल कर सकें।
उन्होंने कहा कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी और जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी दिल्ली के लिए मुस्लिम वर्ग कोई भी कुर्बानी देने के लिए तैयार है। इन दोनों शिक्षण संस्थाओं को अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान का दर्जा प्राप्त है। अगर किसी सरकार ने इन संस्थाओं से अल्पसंख्यक संस्था होने का दर्जा छीना तो उसके खिलाफ पूरे देश के मुसलमान आंदोलन करेंगे।