चंदौसी। रेलवे ट्रेनिंग कालेज के कार्यालय अधीक्षक रनवीर सिंह की हत्या में पुलिस अभी नामजदगी पर भरोसा नहीं कर पा रही है। यह दीगर बात है कि कोतवाली पुलिस दोनों नामजदों को जेल भेजकर अपना काम निपटाने की जल्दी में लग रही है। लेकिन, अधिकारियों ने जब इस मामले को गहराई से समझा तो अभी नामजदगी पर पूरा भरोसा नहीं कर पा रहे हैं। यही कारण है कि पुलिस अधिकारी चाहते हैं कि भले ही कुछ समय और लग जाए। लेकिन, निष्पक्ष जांच के बाद ही वास्तविक आरोपी गिरफ्तार होने चाहिए।
रेलवे ट्रेनिंग कालेज के सरकारी क्वार्टर में 21 मार्च को दोपहर करीब 2.30 बजे कार्यालय अधीक्षक रनवीर सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई। मृतक के अपनी ही सहलिपिक सोनिया कश्यप से संबंध बताए जा रहे थे। जिसकी जानकारी मृतक की पत्नी को भी थी, यही कारण था कि पत्नी कार्यालय अधीक्षक को अकेला छोड़कर अपने बेटे के पास दिल्ली जाकर रहने लगी थी।
मृतक के बेटे 21 मार्च को देर रात कोतवाली पहुंचे। लेकिन, उन्होंने रिपोर्ट में लिखाया कि वह घटना के समय घर पर ही मौजूद थे। उन्होंने नामजद आरोपी सतीश चंद्र, सोनिया कश्यप व एक अन्य की आवाजे भी सुनी। मृतक के बेटों ने रिपोर्ट लिखाने से पूर्व शहर कोतवाल से एकांत में काफी देर बातचीत भी की। उसके बाद रिपोर्ट लिखाई गई। पुलिस ने नामजदों को तत्काल ही पूछताछ के लिए पकड़ लिया।
उनसे घटना वाले दिन से अब तक कोतवाली में ही बैठाकर पूछताछ की बात कही जा रही है। हालांकि कोतवाली पुलिस दोनों नामजदों की गिरफ्तारी दिखाकर जेल भेजने की जल्दी में दिख रही है। लेकिन, मामला उच्चाधिकारियों के भी संज्ञान में हैं।
इसलिए अब इस मामले के खुलासे में एसओजी को भी लगा दिया गया है। अपर पुलिस अधीक्षक पंकज कुमार पांडेय ने भी सोमवार को कोतवाली पहुंचकर नामजदों से पूछताछ की। हालांकि पुलिस अभी तीसरे आरोपी को नहीं तलाश पाई है। कोतवाली प्रभारी ऋषिराम कठेरिया ने बताया कि अभी मामले की जांच चल रही है। अभी किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है।