संभल। जिला संयुक्त चिकित्सालय संभल के दवा खरीद घोटाले के आरोपी निलंबित फार्मासिस्ट ने सोमवार दोपहर को अपने सरकारी आवास पर विषाक्त पदार्थ खाकर आत्महत्या की कोशिश की। हालांकि हालत बिगड़ने पर परिजनों ने उसे संयुक्त चिकित्सालय में भर्ती कराया। यहां से शहर के ही निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है लेकिन यहां उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। विभागीय मशीनरी से परेशान फार्मासिस्ट को दो साल से वेतन नहीं मिल पाया था। वह दो बार न्यायालय की शरण में भी गया था। प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री को भी उसने ट्वीट करके भी अपनी परेशानी बताई थी लेकिन समाधान नहीं मिलने से सोमवार को उसने आत्मघाती कदम उठाया। घटना से चिकित्सा विभाग में हड़कंप मच गया है।
निलंबित फार्मासिस्ट केके हटवाल जिला संयुक्त चिकित्सालय परिसर में बने सरकारी आवास में ही अपने परिवार सहित रह रहा है। पिछले काफी दिनों से वह परेशान था, क्योंकि 17 दिसंबर-2016 से उसे अभी तक वेतन नहीं मिल पाया था। परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा था। मामला घोटाले का होने के कारण विभागीय अधिकारी-कर्मचारी भी उसकी कोई मदद नहीं कर पा रहे थे। उसने प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री को भी ट्वीट करके वेतन नहीं मिलने से आ रही आर्थिक और मानसिक दिक्कतों से अवगत कराया था लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो सका था।
बताते हैं कि सोमवार की दोपहर करीब साढ़े बारह बजे केकेे हटवाल अपने आवास पर ही मौजूद था, तभी उसने कोई विषाक्त पदार्थ पी लिया। जब उसकी हालत बिगड़ी तो उसकी पत्नी देवंती हटवाल चीख पड़ी। शोर-शराबा होने पर अस्पताल कर्मी भी दौड़कर पहुंचे। शीघ्रता से हटवाल को जिला संयुक्त चिकित्सालय लाया गया। सभी डाक्टर उपचार में जुट गए लेकिन हालत गंभीर देखते हुए उसे हायर सेंटर रेफर किया गया तो पत्नी व अन्य करीबी संभल के ही फजल एंड आनंद अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां उसका उपचार किया जा रहा है। हालांकि उसकी हालत अभी गंभीर बताई जा रही है। इस घटना से स्वास्थ्य एवं चिकित्सा विभाग में खलबली मच गई है।
यह है घटनाक्रम
फार्मासिस्ट कृष्णकांत हटवाल संभल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र संभल में करीब डेढ़ दशक से भी अधिक समय से तैनात है। जब संभल में जिला चिकित्सालय बना तो वर्ष-2016 में फार्मासिस्ट केके हटवाल का जिला संयुक्त चिकित्सालय में तबादला कर दिया गया। इसी बीच फार्मासिस्ट पर बिना सीएमएस की अनुमति के दवाइयां खरीदने, उनमें घोटाला करने आदि के कई गंभीर आरोप लगे तो मुख्य चिकित्साधीक्षक ने शासन को रिपोर्ट भेज दी। जिस पर महानिदेशक (स्वास्थ्य) के आदेश पर 17 दिसंबर-2016 को केके हटवाल को निलंबित कर दिया गया लेकिन निलंबन आदेश उसे रिसीव नहीं कराया जा सका। मुख्य चिकित्साधीक्षक डा. एके गुप्ता के अनुसार 2016 में ही केके हठवाल को सीएमओ कार्यालय के लिए कार्य मुक्त किया गया लेकिन उसके बाद उसने कहीं भी ज्वायनिंग नहीं की थी। तबादला आदेश के खिलाफ कोर्ट चला गया। कोर्ट के आदेश पर महानिदेशक (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं) ने सीएमओ को आदेश दिया कि वह केके हठवाल का योगदान लें। इस पर केके हटवाल को दो जनवरी-2019 को ज्वाइन कराया गया। उसी दौरान महानिदेशक के आदेश के क्रम में चार जनवरी-2019 को निलंबन आदेश भी रिसीव कराते हुए केके हठवाल को अपर निदेशक (स्वास्थ्य) मुरादाबाद के कार्यालय से अटैच कर दिया गया। लेकिन फार्मासिस्ट ने फिर भी ज्वायनिंग नहीं किया और अटैचमेंट आदेश के खिलाफ भी न्यायालय चले गए। जो अभी विचाराधीन है।
--------------------------------------------
फार्मासिस्ट केके हटवाल को इसलिए वेतन नहीं मिल पा रहा है, क्योंकि उसकी कहीं भी ज्वायनिंग ही नहीं है। जब कहीं उपस्थिति ही दर्ज नहीं है तो वेतन कैसे मिलेगा। उसे एडी (हेल्थ) कार्यालय के अटैच किया गया था, यदि वह अपना योगदान वहां देता तो निलंबन अवधि का भी नियमानुसार वेतन उसे मिल जाता। इनके मामले में अभी जांच भी चल रही है और कोर्ट में भी मामला विचाराधीन है।
-डा. एके गुप्ता, मुख्य चिकित्साधीक्षक, जिला संयुक्त चिकित्सालय संभल।
--------------------------------------------
-फार्मासिस्ट केके हटवाल को महानिदेशक व न्यायालय के आदेश के अनुपालन में ज्वायन कराकर एडी (हेल्थ) कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया था लेकिन इसके बावजूद भी फार्मासिस्ट ड्यूटी पर नहीं आया। फिलहाल तो उसने कोई विषाक्त पदार्थ खाया है, उसका उपचार कराया जा रहा है। उससे बातचीत के बाद ही जानकारी हो सकेगी कि ऐसा कदम उसने क्यों उठाया।
डा. अमिता सिंह, मुख्य चिकित्साधिकारी संभल।
-----------------------------------------------
संभवत फार्मासिस्ट ने कीटनाशक बेगॉन पी लिया है, उसे बाहर निकाला गया है, एंटीडोज दी गई है, करीब साढ़े तीन घंटे की मशक्कत के बाद अब वह बातचीत सुनने नायक हो गया है, दिमाग भी काम करने लगा है लेकिन अभी हालत नाजुक है, 72 घंटे के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा।
-डा.आनंद सिंह, सर्जन फजल एंड आनंद हास्पिटल संभल।
-------------------------------------
-मुख्य चिकित्साधीक्षक डा. एके गुप्ता लगातार मेरे पति का उत्पीड़न कर रहे थे। दो साल से बिना निलंबित किए वेतन नहीं दिया। पिछले महीने ज्वायनिंग कराई तो पुराने आदेश पर फिर निलंबित करके एडी कार्यालय से अटैच कर दिया, जिससे वह काफी डिप्रेशन में थे। इसलिए उन्होंने आत्मघाती कदम उठा लिया।
-देवंती हटवाल, फार्मासिस्ट की पत्नी।