संभल। संभल के कोरोना संक्रमित बुजुर्ग किसान का अंतिम संस्कार तमाम बाधाओं के बाद आखिरकार मौत के 46 घंटे बाद मंगलवार को दिन में दस बजे मेरठ में हो गया। मेरठ और संभल प्रशासन में इसे लेकर देर रात तक बात हुई तब निष्कर्ष निकला। वरना अंतिम संस्कार में बाधा पड़ी हुई थी। संभल का प्रशासन मेरठ में और मेरठ का प्रशासन संभल में अंतिम संस्कार कराने का प्रयास कर रहा था लेकिन जब जिलाधिकारी संभल ने देर रात मेरठ के जिलाधिकारी से फोन पर बातचीत की तो मेरठ का प्रशासन अपने यहां पर अंतिम संस्कार के लिए सहमत हो गया।
संभल जिले के ईसापुर सुनवारी निवासी बुजुर्ग किसान की कोरोना संक्रमित होने की वजह से मेरठ मेडिकल कालेज में रविवार को दोपहर 12 बजे मौत हो गई थी। मौत होने की सूचना देर शाम किसान के बेटे को मिली। बेटा क्वारंटीन में था। इसलिए गांव से भतीजे को भेजा गया। भतीजे ने मेरठ में ही अंतिम संस्कार की सहमति दी और इसको लेकर संभल के प्रशासन ने उसे एक पत्र भी दिया था। भतीजा सोमवार को दिन में दो बजे से लेकर रात में 11 बजे तक भटकता रहा। नौ घंटे तक कोई निष्कर्ष नहीं निकला जब निष्कर्ष नहीं निकला तो उसने संभल के जिलाधिकारी को अवगत कराया।
जिलाधिकारी ने कई बार जिलाधिकारी मेरठ के सीयूजी नंबर पर कॉल की लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। इस पर मामला शासन के संज्ञान में पहुंचा। तब देर रात संभल के जिलाधिकारी की बात मेरठ के जिलाधिकारी से हुई और अंतिम संस्कार मेरठ में कराए जाने के लिए मेरठ के जिलाधिकारी सहमत हो गए।
मेरठ के जिलाधिकारी की सहमति के बाद मेरठ में मंगलवार को सुबह दस बजे के करीब अंतिम संस्कार हुआ। इसके बाद किसान का भतीजा वहां से लौट आया। किसान के बेटे ने बताया कि संभल के प्रशासन ने मेरठ में अंतिम संस्कार कराए जाने की सहमति ली थी जबकि मेरठ का प्रशासन वहां अंतिम संस्कार नहीं कराना चाहता था। इसलिए करीब 46 घंटे बाद अंतिम संस्कार हो सका।