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परिषदीय विद्यालयों में फर्नीचर सप्लाई के नाम पर हो रहा बड़ा खेल

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चंदौसी के एक परिषदीय स्कूल में आते ही टूट गया फर्नीचर। - फोटो : CHANDAUSI
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चंदौसी। ऐसे परिषदीय विद्यालय जिनमें छात्र संख्या एक सौ से अधिक है। उनमें शासन के निर्देश पर बच्चों के बैठने की व्यवस्था की है। प्रत्येक उच्च प्राथमिक विद्यालय में 35 बेंच (कुसी मेच एक ही में) दी जा रही है। इसके लिए शासन ने जिले के 95 विद्यालयों को करीब डेढ़ करोड़ रुपया उपलब्ध करा दिया है। लेकिन फर्नीचर की इस खरीद में भारी खेल हो रहा है। सत्तारूढ़ दल के एक नेता के करीबी ने इसका ठेका लिया है, जो फर्नीचर उपलब्ध कराया जा रहा है। वह काफी घटिया स्तर है। आरोप है कि कई प्रधानाचार्यों ने इसका भुगतान करने से भी मना कर दिया है। उन पर सत्ता का रौब दिखा कर उन पर भुगतान करने को दबाव बनाया जा रहा है।
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मामला 148.20 लाख रुपये का है। इस योजना के तहत ऐसे उच्च प्राथमिक विद्यालयों को पहले चयनित किया गया है, जहां बच्चों की संख्या 100 या उससे अधिक है। संभल जिले में करीब बारह सौ से अधिक परिषदीय स्कूलों में 95 ऐसे उच्च प्राथमिक विद्यालय चयनित किए गए हैं। जिनमें फर्नीचर उपलब्ध कराने के लिए प्रत्येक विद्यालय में 1.56 लाख रुपये दिए गए हैं। इन रुपये में से फर्नीचर खरीदा जा रहा है। कुल 95 विद्यालयों को 148.20 लाख रुपये दिए गए हैं।
इतनी बड़ी रकम पर कुछ ठेकेदारों की नजर पड़ गई है। बताते हैं कि सत्तारूढ़ दल के एक बड़े नेता को अपना करीबी बताकर एक ठेकेदार ने स्कूलों को ठेकेदारी पर फर्नीचर उपलब्ध कराना शुरू कर दिया है। लेकिन जब फर्नीचर पर शिक्षकों की नजरें पड़ी तो हैरत में रह गए। दबी जुबान शिक्षकों का कहना है कि फर्नीचर काफी घटिया क्वालिटी का है। इसमें कुछ बेंच तो पहले ही दिन टूट गई हैं। कुछ शिक्षकों ने भुगतान करने से मना किया तो उन शिक्षकों पर सत्ता रूढ़ नेता का करीबी बताकर भुगतान के लिए दबाव बनाया जा रहा है।
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आधे बच्चे बेंच पर तो आधे नीचे बैठेेंगे
-बेसिक शिक्षा परिषद ने जिले के 95 विद्यालयों में 35-35 कुर्सी कम बेंच उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है, लेकिन स्कूल वह चयनित किए हैं, जिसमें 100 से अधिक बच्चे हैं। सवाल यह है कि विद्यालय में सौ से अधिक बच्चे। जिनमें सिर्फ 35 बेंच पर बैठेंगे, शेष सभी जमीन पर जैसे के तैसे ही रहेंगे। उपलब्ध कराई जानी वाली बेंच एक क्लास के लिए भी पूरी नहीं होगी। यानी एक क्लास में भी आधे बच्चे बेंच पर और शेष बच्चे नीचे बैठेंगे।
त्रिस्तरीय सत्यापन के बाद होना चाहिए भुगतान
-जो फर्नीचर विद्यालय में उपलब्ध कराया जाना है। उसका भुगतान नियमानुसार तभी किया जाना है। जब उसका सत्यापन न्याय पंचायत समन्वयक और संबंधित ब्लाक का खंड शिक्षा अधिकारी भी कर लें। तीनों की संस्तुति के बाद ही भुगतान किया जाएगा। यदि इस मामले की जांच की गई तो खराब फर्नीचर के लिए दोषी भी प्रधानाध्यापक के साथ-साथ एनपीआरसी और खंड शिक्षा अधिकारी को भी माना जाएगा।
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