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Sambhal News: उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की आराधना के साथ दशलक्षण विधान का समापन

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बहजोई। श्रीदिगंबर जैन मंदिर में दशलक्षण महापर्व का शुक्रवार को अनंत चतुर्दशी पर समापन हो गया। अंतिम दिन उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की श्रद्धापूर्वक आराधना की गई। इस दौरान दशलक्षण महामंडल विधान का विधिवत समापन हुआ।
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भगवान वासपूज्य जी का मोक्षकल्याणक भी मनाया गया। विश्व कल्याण और सुख-शांति के लिए हवन में विशेष आहुतियां दी गईं। श्रीदिगंबर जैन सभा के महामंत्री संभव जैन ने बताया कि उत्तम ब्रह्मचर्य दसवां और अंतिम धर्म है। इसका आध्यात्मिक अर्थ विषय-वासनाओं से निवृत्त होकर अपने शुद्ध आत्मस्वरूप में रमण करना है।
सुबह श्रीजी के अभिषेक और शांतिधारा में संजय छुट्टन जैन, संभव जैन, मोहित जैन व अंशुल जैन ने पुण्यार्जन किया। विद्वान चंद्रकुमार जैन शास्त्री ने कहा कि विषय-वासनाओं से दूर रहकर संयम और आत्मचिंतन ही ब्रह्मचर्य धर्म की सार्थक आराधना है।
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शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम में जैनत्व प्रश्नपत्र प्रतियोगिता हुई। विधान के दौरान प्राची, साक्षी, कविशा, पाखी, प्रियल, अनन्या, विधि व यशवी जैन अष्टकुमारी बनीं। अक्षरा व विदुशी जैन को राजकुमारी बनने का सौभाग्य मिला। कार्यक्रम में संरक्षक राजेंद्र जैन व अध्यक्ष सुनील कुमार जैन समेत मनोज कुमार, प्रेरक जैन, राहुल, वंदना, राशि, स्वाति, पारूल, शिखा व आकांक्षा आदि रहे।
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