संभल। हस्तशिल्प उद्यमी तो बजट से बहुत अधिक उत्साहित नहीं हैं क्योंकि उन्हें हस्तशिल्प उत्पादों को कर मुक्त किए जाने की उम्मीद थी जो नहीं हो सका। यही हाल मेंथा इंडस्ट्री का है। दोनों उद्योग विदेशी मुद्रा जुटाती हैं लेकिन इन्हें इसके बदले में कोई प्रोत्साहन नहीं मिल सका है। उद्यमियों से वार्ता की गई तो उनका कहना था कि सरकार ने बजट में निर्यात को प्रोत्साहन देने की बात कही है लेकिन इसका ब्योरा अभी सामने नहीं आया है।
ब्योरा आता है तो कुछ कहा जा सकेगा। मेंथा उत्पादों के प्रमुख निर्यातक आशुतोष रस्तोगी ने कहा कि सरकार ने प्रत्येक जिले से कोई न कोई उत्पाद निर्यात किए जाने के संकेत दिए हैं और इसके लिए कोई योजना सामने आ सकती है। जब यह योजना आए तो कुछ बेहतर हो सकेगा। उनकी नजर में जो उद्योग विदेशी मुद्रा जुटाने में सक्षम हैं उन उद्योगों को प्रोत्साहन देने के लिए उद्यमियों और सरकारी तंत्र की संयुक्त समितियां बनाई जाएं। वहीं हस्तशिल्प उत्पादों के निर्यात से विदेशी मुद्रा जुटाने वाले समूह में शामिल कमल कौशल वार्ष्णेय ने कहा कि अगर सरकार चीन की तर्ज पर भारतीय उद्यमियों के साथ प्रोत्साहन भरा रुख अपनाए तो देश की तस्वीर बदलेगी। उद्योग बढ़ेगा तो रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। बताते चलें कि 2500 करोड़ रुपये वार्षिक टर्नओवर वाली मेंथा इंडस्ट्री है और 100 करोड़ रुपये से अधिक टर्न ओवर वाली हस्तशिल्प निर्यात इंडस्ट्री है।