संभल के बहजोई में कलक्ट्रेट के निकट बड़ा मैदान पर तैयारी करते कर्मी।
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प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार को संभल जिले के बहजोई में आ रहे हैं। जिले भर की निगाहें मुख्यमंत्री के कार्यक्रम पर टिकी हुईं हैं। जैसा कि प्रशासन ने बताया है उसके हिसाब से मुख्यमंत्री का दौरा कानून व्यवस्था और विकास कार्यों की समीक्षा के लिए हो रहा है।
जिले के अधिकारी कानून-व्यवस्था और विकास संबंधी मामलों में आंकड़े पेश करेंगे पर हकीकत तो जनता ही बता सकेगी। जनता की ओर से जनप्रतिनिधि मुख्यमंत्री से मिलेंगे। वे भी कुछ न कुछ मांगें रखेंगे, लेकिन 28 सितंबर 2011 को गठित किए गए मात्र सात वर्ष की उम्र के इस नए जनपद के लिए क्या जरूरी है। किस क्षेत्र में क्या काम होना चाहिए। इसका जायजा अमर उजाला की टीम ने लिया है। कुछ अहम मुद्दे उभर कर सामने आए हैं।
संभल जिले को सात वर्ष में अपना मुख्यालय नहीं मिला। विकास खंड मुख्यालय के भवनों में जिला संचालित है। अधिकारियों के पास आवास नहीं हैं। जिला स्तरीय अधिकारी एक-एक कोठरी में बैठ रहे हैं। पुलिस लाइन मंडी के टीन शेड में संचालित है। जबकि संभल के साथ 28 सितंबर 2011 को वजूद में आए शामली जिले में मुख्यालय के साथ सारे कार्यालय बन गए हैं, लेकिन संभल जूझ रहा है। चुनिंदा लोगों का कहना है कि अगर मुख्यमंत्री की नजरें इनायत हो जाएं तो संभल को आधारभूत ढांचा मिल जाएगा और जिले की तस्वीर बदल जाएगी। क्योंकि संभल वह जिला है जहां लोगों के पास हुनर और काबिलियत की कोई कमी नहीं है।
संभल और सरायतरीन के लोगों को हाथों का बनाया हुआ हस्तशिल्प पूरे संसार में चमकता है। आधारभूत सुविधाओं की कमी अखरती है। मुख्यमंत्री जिला मुख्यालय बनाने के लिए जमीन खरीदने के लिए 70 करोड़ रुपये आवंटित करा दें और फिर विभागों के कार्यालय बनाने के लिए बजट जारी हो जाए तो यह जनपद विकास के मामले में रफ्तार पकड़ेगा और कानून-व्यवस्था में भी सुधार नजर आएगा।