संभल। जिले के सैकड़ों विद्यालयों ऐसे हैं जहां पर विद्यार्थी फर्श पर बैठकर अर्श पर पहुंचने की तैयारी करते हैं। जबकि बेसिक शिक्षा विभाग सरकारी विद्यालयों को मॉडल और अंग्रेजी माध्यम के रूप में विकसित करने का दावा करता है। हकीकत देखी जाए तो अभी व्यवस्था काफी पिछड़ी है। बृहस्पतिवार को पड़ताल के दौरान परिषदीय विद्यालयों की तस्वीर सामने आई।
जिले के 1280 परिषदीय विद्यालय में से 670 विद्यालयों में अभी भी बच्चे चटाई या पट्टी पर बैठकर पढ़ाई करते हैं। साथ ही जिन विद्यालयों में फर्नीचर की व्यवस्था है, उनमें भी ज्यादातर विद्यालयों में सीएसआर के माध्यम से फर्नीचर लगा है। विभागीय स्तर से बेहतर पहल नहीं की गई है। जबकि स्कूलों में कायाकल्प के नाम पर करोड़ों रुपये खपा दिए गए, लेकिन बच्चों की सुविधा के लिए खास कदम नहीं उठाए। कई स्कूल ऐसे हैं जहां पर पंखे तो लगे हैं, लेकिन बिजली जाने के बाद इन्वर्टर की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में बिजली जाने के बाद बच्चे गर्मी में बैठकर पढ़ाई करते हैं। शिक्षकों ने बताया कि कई बार लिखकर दिया है लेकिन समाधान हो नहीं सका।
गर्मी में जमीन पर बैठकर पढ़ाई करते मिले बच्चेपवांसा ब्लॉक के गांव बिजपुरी परिषदीय विद्यालय में बच्चे गर्मी से बेहाल जमीन पर बैठकर पढ़ाई करते दिखाई दिए। इसी तरह गांव खिरनी मोहिउद्दीनपुर, शेखुपुर मढ़ी , बिचपुरी, करीमपुर घेर, लधनपुर शाहबाजपुर, बंजरपुरी, मल्लाह मुस्तफाबाद, करीमपुर मिलक सैंजना, शेरपुर की मढैया, चपतियों की मढैया, असलमपुर, मिलक मड़भूढ, सिहोरी, फत्तेहपुर उत्तमा, नाई वाली मढ़ैया, मंगलपुर में भी बच्चे जमीन पर बैठे मिले।
सीएसआर के माध्यम से 47 विद्यालयों के लिए बना फर्नीचर
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अलका शर्मा ने बताया कि सीएसआर फंड के माध्यम से 1160 बैंच को तैयार कराया गया है। यह बैंच जिले के 47 विद्यालयों में भेजी जाएंगी। इसके अलावा वित्तीय वर्ष 2024-25 में शासन स्तर से 1245 बैंच की स्वीकृति मिली है। इसकी प्रक्रिया को भी जल्द शुरू कराया जाएगा। जिससे बच्चों को जमीन पर बैठने से राहत मिल सके।
कोट
47 विद्यालयों में जल्द ही फर्नीचर की व्यवस्था हो जाएगी। उसकी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। शासन की ओर से वित्तीय वर्ष 2024-25 में 42 विद्यालयों के लिए फर्नीचर की व्यवस्था की जाएगी। सीएसआर के माध्यम से भी प्रयास जारी रहेगा। जिससे बच्चों की समस्या का समाधान हो सके।
अलका शर्मा, बीएसए, संभल।
अलका शर्मा, बीएसए, संभल।