बाहर आग देखकर कमरे में मौजूद महिला व उसकी ननद ने कमरे को अंदर से बंद कर लिया, जिसमें दो बच्चे भी थे। आग भड़की तो चारो बेहोश होकर वहीं गिर गए। ग्रामीण युवाओं ने खुद की जान जोखिम में डालकर छत को तोड़कर चार जिंदगियों को सकुशल बचा लिया।
रंपुरा रामरायपुर गांव में हरद्वारी लाल जाटव के तीन बेटों जसवंत, सत्यवीर व चंद्रसेन का परिवार एक ही घर में रहता है। आर्थिक स्थिति कमजोर है। घर की छत गाडर से बनी है। मंगलवार को दोपहर बाद करीब दो बजे सत्यवीर की पत्नी कुसुम (22), दो साल की बेटी सिंकी, दो माह का बेटा और बहन रूपवती (15) कमरे मे बैठे थे। इसी बीच कमरे के दरवाजे पर पड़े छप्पर के ऊपर रखे पुआल पर किसी तरह आग लग गई।
छप्पर जलने लगा, नीचे भी आग गिरने लगी तो कमरे में बैठी कुसुम ने बचने के इरादे से कमरे का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। लेकिन कमरे में धुआं भरने लगा। बाहर निकलने का स्थान आग के कारण बंद हो गया। आखिरकार दोनों मासूमों के साथ सभी बेहोश होकर कमरे में ही गिर गए। इस बीच सत्यवीर ने कहा कि उसकी पत्नी, बच्चे व बहन अंदर हैं तो सभी के होश उड़ गए। लेकिन ग्रामीण युवाओं, विजय सिंह, नेम सिंह, प्रधान सत्यराम, सूरजपाल, प्रेमसागर, धीरेंद्र कुमार, पप्पू आदि दौड़ पड़े।
दीवार में नकब लगाकर फंसे हुए लोगों को निकालने की कोशिश की। लेकिन सफलता नहीं मिली तो युवा छत पर चढ़े और सरियों, बल्लम आदि से छत तोड़ी। रस्सी पकड़कर विजय सिंह धुंध भरे कमरे में कूद गया और शीघ्रता से एक-एक करके सभी को रस्सी से बांधकर ऊपर खींचा गया। सभी को कुछ देर बाद होश आ गया। लेखपाल आकाश कुमार ने बताया कि आग लगने से करीब पचास हजार की संपत्ति जली है। सबसे बड़ी बात यह रही कि इसमें फंसे लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया। आग लगने का कारण स्पष्ट नहीं हुआ है।