जबकि इस भवन को करीब आठ वर्ष पहले ही जर्जर घोषित किया जा चुका है। इसके अलावा कई अन्य सरकारी दफ्तर जर्जर भवनों में संचालित हैं। अधिवक्ताओं ने एसओसी मिलकर भवन की मरम्मत कराने की मांग की है।
आमजनों के तो दूर सरकारी भवनों का भी कोई पुरसाहाल नहीं है। तभी तो बारिश में कई स्थानों पर निजी भवनों के ढहने के बाद अब सरकारी दफ्तर भी खतरे के मुहाने पर हैं। पुरानी तहसील के जर्जर भवन में संचालित एसओसी कार्यालय के बरामदे की छत का एक हिस्सा गिर गया। यदि कोई व्यक्ति छत के नीचे होता तो उसकी जान जा सकती थी लेकिन गनीमत रही कि जब छत की ईंटें गिरीं तो कोई व्यक्ति उसके नीेचे था नहीं।
बरामदे की छत गिरने की घटना के बाद तहसील के अधिवक्ताओं ने एसओसी से मिलकर कहा कि छत की मरम्मत कराएं। साथ एसओसी, डीडीसी और सीओ चकबंदी के न्यायालयों को भी दिखवाएं अगर कहीं पर हादसे की संभावना है तो उसे खत्म करने के लिए मरम्मत करा दें। अन्यथा कार्यालयों को सुरक्षित भवनों में स्थापित कराएं।
गौरतलब है कि आठ वर्ष पहले जर्जर घोषित हो चुकी तहसील संभल की पुरानी इमारत में चकबंदी विभाग की अदालतें और कार्यालय संचालित हैं। चकबंदी विभाग का रिकार्ड कार्यालयों में रखा है। भवन इतने जर्जर हैं कि कभी भी हादसा हो सकता है। जुलाई में एक बार पुराने तहसील भवन का हिस्सा गिर चुका है। इसके बावजूद प्रशासन नहीं चेता है।