संभल। जिले में स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हैं। कहीं चिकित्सक नहीं हैं तो कहीं स्वास्थ्य उपकरण नहीं है। संभल सीएचसी सिर्फ एक एमबीबीएस डॉक्टर के हवाले है। सीएचसी में एफआरयू (फर्स्ट रेफरल यूनिट) तो बना दी लेकिन स्त्री रोग और एनस्थीसिया विशेषज्ञों की तैनाती करना विभाग भूल गया। इसलिए यह निष्क्रिय पड़ी है। स्टाफ नर्स द्वारा ही प्रसव कराया जाता है।
संभल सीएचसी वैसे तो जर्जर भवन में संचालित है लेकिन इसकी व्यवस्था भी जर्जर ही है। सीएचसी प्रभारी ही एमबीबीएस चिकित्सक हैं। उनके सहारे ही यह अस्पताल संचालित हो रहा है। तीन आयुष चिकित्सक और अटैचमेंट किए गए चिकित्सकों के सहारे ओपीडी हो जाती है। सीएचसी में महिला चिकित्सक की तैनाती न होने की वजह से स्टाफ नर्स ही प्रसव कराती है। दो दंत चिकित्सक की तैनाती है लेकिन उनको डेंटल चेयर उपलब्ध नहीं कराई है। ऐसे में मरीजों को जिला अस्पताल या निजी अस्पताल के चक्कर लगाने पड़ते हैं। यह स्थिति लंबे समय से बनी हुई है लेकिन जिम्मेदार सुधार कराने के लिए जहमत नहीं उठा रहे।
रेफरल सेंटर बन गया है सीएचसी
प्रसव स्टाफ नर्स द्वारा कराए जाते हैं। यदि शिशु की हालत बिगड़ जाए तो देखने के लिए बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं है। जिला अस्पताल के लिए रेफर करना पड़ता है। इसी तरह हड्डी रोग, सर्जन, सामान्य सर्जन, नेत्र रोग विशेषज्ञ व अन्य विशेषज्ञ चिकित्सकों के पद रिक्त चल रहे हैं। मरीज सामान्य दवाई लेकर ही लौट जाते हैं। जो सुविधाएं पीएचसी पर मिलती हैं वहीं सुविधाएं शहर के सीएचसी पर मिल रही हैं।
चिकित्सकों की कमी है। रिक्त पदों को भरने की मांग की जाती रही है। यदि रिक्त पद भर जाएं तो मरीजों को असुविधा नहीं होगी। एफआरयू भी इसलिए ही संचालित नहीं हो पा रही है क्योंकि महिला चिकित्सक की तैनाती नहीं है। -डॉ. मनीष अरोड़ा, प्रभारी, सीएचसी, संभल