संभल के मियां सराय में चांदी वर्क कूटते कारीगर।
संभल का चांदी वर्क देश- विदेश की मिठाइयों का जायका बढ़ाता है। उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा संभल में चांदी वर्क का कारोबार होता है। कारोबारी कच्चा माल लाकर चांदी वर्क तैयार कराते हैं। संभल में करीब 5000 कारीगर चांदी वर्क तैयार करते हैं। करीब 200 कारोबारी वर्क तैयार करके दिल्ली के खारी बावली के बाजार में सप्लाई करते हैं। वहां से चांदी वर्क विदेशों में भेजा जाता है।
संभल के कारोबारी कच्चा माल दिल्ली से खरीदकर लाते हैं तथा यहां पर कारीगरों से चांदी का वर्क तैयार कराकर दिल्ली के कारोबारियों को ही सप्लाई करते हैं।
यह चांदी वर्क मिठाइयों का जायका तो बढ़ाता ही है, साथ ही देशी दवाओं में भी मिलाया जाता है। तंबाकू का जायका बढ़ाने के लिए भी चांदी वर्क का इस्तेमाल किया जाता है। हकीमों का मानना है कि चांदी वर्क दिल और दिमाग की बीमारी में फायदा करता है। शरीर की ताकत भी बढ़ाता है। यह चांदी वर्क दिल्ली से अमेरिका, सऊदी अरब समेत कई देशों में भेजा जाता है। जिससे विदेशी मिठाइयों का जायका बढ़ाया जा सके।
कारीगर थोड़ी सी परत को चमड़े में रख लेते हैं। उसे लोहे के हथौड़े से तब तक कूटते हैं जब तक वह बड़ी न हो जाए। तैयार चांदी की परत को दो कागजों के बीच सावधानी के साथ रख दिया जाता है। एक चमड़े में करीब 150 चांदी वर्क एक साथ तैयार किए जा सकते हैं। दिनभर में एक कारीगर तीन गड्डी चांदी वर्क तैयार कर देता है। एक गड्डी चांदी वर्क तैयार करने की मजदूरी 60 रुपये हैं। पूरे दिन में एक कारीगर 180 से 200 रुपये कमा लेता है।