इसका खुलासा तब हुआ जब चालक अपने साथ एक हेल्पर को लेकर चलने लगा। इस मामले की जानकारी स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों को है पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इस चालक को एंबुलेंस के साथ-साथ एक और गाड़ी की जिम्मेदारी दी गई है।
संभल जिले में एक एंबुलेंस चालक की आंखें कमजोर हो गईं हैं। चालक को शाम होते ही कम दिखाई देता है। इसके चलते वह गाड़ी चलाने में असुविधा महसूस करता है। अब वह अपनी नौकरी बचाने के लिए हेल्पर से गाड़ी चलवाता है। इस मामले की जानकारी स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों को होने के बावजूद न केवल अनदेखी की जा रही है। बल्कि उस चालक के हवाले दो गाड़ियां छोड़ी गई हैं।
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चालकों की नेत्र जांच पर गंभीर नहीं महकमे
संभल। चालकों की नेत्र जांच के लिए कोई भी महकमा गंभीर नहीं है। सिर्फ औपचारिकता ही पूरी की जा रही है। अगर चालकों के आंखों की जांच समय से की जाए तो खुद ही पता चल जाएगा कि कितने चालक सरकारी महकमों के काम के लायक बचे हैं। उन्हें आई साइड के मुताबिक चश्मे या कॉन्टेक्ट लेंस मुहैया कराए जाएं जिससे समस्या न हो।
शिकायत पर करेंगे जांच
एआरटीओ छबि सिंह चौहान ने बताया कि जो लोग एंबुलेंस चलाते हैं उनके लिए कॉमर्शियल लाइसेंस जरूरी होता है। इस लाइसेंस का प्रत्येक तीन वर्ष में तभी नवीनीकरण होता है जब सेहत संबंधी जांच के साथ आंखों की भी जांच हो जाए। जहां तक एंबुलेंस चालक की नजर कमजोर होने के बाद भी वाहन चलाने का सवाल है। अगर इसके बारे में कोई शिकायत आती है तो जांच कराएंगे।