बनियाठेर थाने के गांव नगला खोकर निवासी थान सिंह (45) पुत्र भोलू सिंह के पुत्र विक्रम की मार्च में शादी है। पांच दिन पूर्व की विक्रम की सगाई हुई थी। परिजनों के मुताबिक थान सिंह को दस हजार रुपये की जरूरत पड़ी तो ग्राम मुहम्मदपुर बाबई स्थित प्रथमा बैंक शाखा पहुंचे। यहां बैंक के बाहर लंबी लाइन लगी हुई थी। वे भी लाइन में लगे थे, लेकिन शाम चार बजे तक नगदी नहीं मिलने पर नगदी न मिलने पर वे घर लौट रहे थे।
शाम करीब पांच बजे गांव के समीप वे अचानक गिरकर बेहोश हो गए। वहां खेतों पर काम कर रहे गांव के नौबत, पीतांबर आदि ने इसकी सूचना थान सिंह के घर पर दी। पुत्र विक्रम व परिजन वहां पहुंच गए। थान सिंह को संभल स्थित निजी चिकित्सक के ले गए लेकिन उसे मृत घोषित कर दिया गया। उसकी मौत से परिजनों में कोहराम मच गया। मृतक थान सिंह गांव के वार्ड पांच से ग्राम पंचायत सदस्य था। देर रात जब शव गांव पहुंचा तो परिजनों में कोहराम मच गया। मृतक पर दो पुत्रियां व दो पुत्रों, पत्नी उषा देवी को रोता बिलखता छोड़ गया है।
नोटबंदी के पचास दिन पूरे होने के बाद भी दिक्कत
धनारी। नोटबन्टी के पचास दिन पूरे होने के बाद बैंक में नही सुधर रही हालात। किसान परेशान होकर दो हजार रूपये को लाईन में लग कर काम चला रहा है। खर्च को रूपये निकालने के लिए सुबह से भूखा प्यासा लगा रहता है। दो हजार रूपये समय से मिल जाने पर खुश होने लगता है। लेकिन मन से दुखी भी होता है। बैंक में लेनदेन की समस्या कब दूर होगी और बच्चों की शादी विवाह व मकान बनाने के लिए लग सकेगें। पहले से आस थी कि रिर्जब बैंक ने नोट की समस्या को पचास दिन में दूर हो जायेगी। लेकिन समय सीमा पूरी होने के बाद हालात दूर नजर नही होते दिखाई पड़ रहे है।
सिंहपुरसानी में कैश की किल्लत
सिंहपुरसानी(संभल)। सिंहपुरसानी स्थित प्रथमा बैंक में रोजाना कतार में लगने के बाद भी तमाम ग्राहकों को कैश नहीं मिल पाता है। जबकि कुछ ग्राहकों को खूब कैश मिल रहा है। सिंहपुरसानी से लोगों ने बताया कि नोटबंदी के पचास दिन बीत जाने के बाद कैश की किल्लत दूर नहीं हुई है। दिन भर कतार में लगे रहने के बाद भी ग्राहकों को रुपये नहीं मिल पा रहे हैं। कुछ लोगों को बैंक के शाखा प्रबंधक द्वारा अधिक तवज्जो दी जा रही है। हालांकि शाखा प्रबंधक इस आरोप को गलत ठहरा रहे हैं।
मांग घटने से प्रिंटिंग कारोबार में छाई मंदी
चंदौसी। नववर्ष पर डायरी, कैलेंडर और पोस्टर की विशेष मांग रहती है। वर्ष 2016 की विदाई और 2017 के स्वागत पर भी नगदी की कमी का असर साफ दिख रहा है। प्रिंटिंग कारोबार घटकर 30 फीसदी रह गया है।नए साल पर अपने प्रतिष्ठान, व्यवसाय की तरक्की के लिए लोग डायरी और कैलेंडर के जरिए शुभ कामनाएं प्रेषित करते हैं। इस बार आठ नवंबर के बाद नोटबंदी के फैसले से पूरी रणनीति और तैयारी ही बदल गई। कारोबारियों को गत वर्षों के सापेक्ष 30 फीसदी आर्डर भी नहीं मिल सके हैं। नए साल पर कैलेंडर, डायरी, पोस्टर की मांग के सापेक्ष नकदी की कमी से मांग घट गई है। नोटबंदी के कारण कारोबार सिमटता नजर आ रहा है।