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सपाई जनप्रतिनिधियों ने वसूली, पोस्टर लगाने की कार्रवाई को बताया अलोकतांत्रिक

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हजोई में जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक करते पुलिस अधीक्षक। - फोटो : CHANDAUSI
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सपाई जनप्रतिनिधियों ने वसूली, पोस्टर लगाने की कार्रवाई को बताया अलोकतांत्रिक
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- पुलिस अधीक्षक ने आश्वस्त किया कि किसी भी निर्दोष पर कार्रवाई नहीं होगी, दोषी बख्शे नहीं जाएंगे
- संभल के दो युवकों की मौत के बाद पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं दिखाने पर उठाए सवाल
अमर उजाला ब्यूरो
चंदौसी। संभल और चंदौसी में नागरिकता संशोधन कानून के विरोध स्वरूप निकाले गए जुलूसों के दौरान हुए उपद्रव में हुए सरकारी संपत्ति के नुकसान की भरपाई के लिए उपद्रव के आरोपियों से वसूली करने को जारी नोटिस व उपद्रवियों की पहचान के लिए लगाए गए पोस्टरों पर जनप्रतिनिधियों की बैठक में सपा के जनप्रतिनिधियों ने कड़ा ऐतराज जताया। इसे अलोकतांत्रिक प्रक्रिया बताया। इस पर पुलिस अधीक्षक ने आश्वस्त किया कि जो लोग निर्दोष हैं, उन पर कोई कार्रवाई नहीं होगी। सिर्फ दोषियों को ही गिरफ्तार किया जाएगा। संभल व चंदौसी में 19 व 20 दिसंबर को उपद्रव हुआ। जिसमें पुलिस ने सैकड़ों लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। उपद्रव के दौरान बनाई गई वीडियो फुटेज व तस्वीरों से फ्लैक्सी बनाकर चौराहों पर लगाई। कई लोगों के खिलाफ वसूली के लिए नोटिस भी जारी किए गए। 43 लोगों को गिरफ्तार भी किया गया। जिससे अब जिले में कार्रवाई को लेकर भय बना है। पुलिस अधीक्षक यमुना प्रसाद ने गुरुवार को बहजोई के कलेक्ट्रेट सभागार जिले के सभी जनप्रतिनिधियों की बैठक बुलाई थी लेकिन इसमें सिर्फ राज्य सभा सदस्य जावेद अली खान व संभल के शहर विधायक/पूर्व कैबिनेट मंत्री इकबाल महमूद ही पहुंचे। अंत में चंदौसी की विधायक व राज्यमंत्री गुलाब देवी के प्रतिनिधि रामपाल सिंह भी पहुंचे। इसमें इकबाल महमूद ने गिरफ्तार किए गए लोगों की पुरजोर पैरवी करते हुए पुलिस प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि उपद्रव सिर्फ संभल जिले में नहीं बल्कि देश के कई जिलों में हुआ। पुलिस द्वारा पोस्टर टांगने की प्रक्रिया लोकतांत्रिक नहीं है। इससे कई लोगों, परिवारों में भय का वातावरण है, क्योंकि पोस्टर में तो उन लोगों के फोटो भी आ गए हैं, जो रास्ते से निकल रहे थे, भीड़ देखकर खड़े हो गए, या फिर उपद्रवियों को समझाने की कोशिश कर रहे थे। सिर्फ उन्हीं पर कार्रवाई हो, जिनके हाथ में ईंट पत्थर या डंडा आदि हो। सांसद जावेद अली खां ने कहा कि वसूली आखिर किस प्रक्रिया के तहत की जा रही है। जब पुलिस उन्हें दोषी साबित कर दे, तभी वसूली होनी चाहिए। संभल में जो दो युवकों की मौत हुई है, उनकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट आखिरकार पुलिस क्यों नहीं दिखा रही है। रिपोर्ट में हजारों की संख्या में अनाम लोगों को शामिल करने पर पुलिस नाम बढ़ाने व नाम निकालने के नाम पर धन वसूली करके उत्पीड़न कर रही है। इस पर पुलिस अधीक्षक यमुना प्रसाद ने जनप्रतिनिधियों को आश्वस्त किया कि किसी भी स्थिति में निर्दोषों पर कार्रवाई नहीं होगी। पोस्टर तो उपद्रवियों की पहचान के लिए लगाए गए हैं, लेकिन कार्रवाई उन पर ही होगी, जो उपद्रव के एक्शन में हैं, उनके हाथ में ईंट, पत्थर या हथियार है। लेकिन दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। रिपोर्ट में नाम बढ़ाने या निकालने को लेकर किसी भी तरह का कोई लेनदेन नहीं होने दिया जाएगा। इसके लिए सभी थाना प्रभारियों, अधिकारियों को सख्त निर्देश दे दिए गए हैं।
फोटो-
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