संभल मंडी समिति में मक्का की आवक का नजारा।
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गन्ने का भुगतान फंस गया। मक्के का भी भरपूर दाम नहीं मिल रहा है। किसान इस स्थिति में परेशान हैं, लेकिन खेती के अलावा को और विकल्प सहज न होने की वजह से किसानों इन्हीं हालातों से जूझना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि उन्हें 1600-1800 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से गन्ने का दाम मिलने की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।
किसानों ने कहा कि अगर गुजरात से मक्के की मांग निकलती तो भाव बढ़ सकता था। फिलहाल मुर्गी दाना के लिए फैक्ट्रियों में मक्के की आपूर्ति की जा रही है। जबकि इससे पहले गुजरात में यूपी की मक्का खरीदी जाती थी और वहां मक्के से 16 तरह के उत्पाद बनते हैं।
संभल मंडी में एक दिन में करीब 1500-2000 क्विंटल मक्के की आवक है। दस दिन के भीतर आवक और बढ़ेगी। आढ़तियों के मुताबिक यह आवक 20,000 क्विंटल प्रतिदिन तक हो सकती है। मक्के की फसल अच्छी है।
मंडी में मक्के का भाव शनिवार को 1200 रुपये प्रति क्विंटल था। जबकि यही भाव दो दिन पहले 1220-1225 रुपये प्रति क्विंटल था। दो दिन में मौसम का मिजाज बदलने की वजह से दाम में थोड़ी सी कमी आई है। बारिश होती है तो मक्के का दाम और घट सकता है।
मंडी में मौजूद आढ़तियों ने शनिवार को बताया कि फिलहाल मुर्गीदाना फैक्ट्रियों के लिए मक्के की आपूर्ति हो रही है, लेकिन आने वाले समय में मक्के की आपूर्ति गुजरात जैसे राज्यों के लिए होने की उम्मीद है। गुजरात में मांग बढ़ी तो मक्के के दाम भी बढ़ेंगे।
आढ़ती वकार हुसैन ने बताया कि गुजरात में कुछ बड़ी फैक्ट्री हैं तो मक्का को प्रॉसिस करके बहुत से खाद्य पदार्थ बनाते हैं। इसके अलावा दूध डेयरियों की बड़ी सप्लाई है। वहां के डेयरी मालिक पूरे वर्ष के लिए जानवरों को मक्का खिलाते हैं।
इसके चलते बड़ी खरीदारी होती है। गुजरात की खरीदारी अभी शुरू नहीं हुई है। गुजरात की खरीदारी से बाजार भाव सुधरने के आसार हैं।