चांदी वर्क के कारोबार पर आए संकट के बाद कारोबारी और कारीगर एकजुट हो गए हैं। शनिवार को शहबाजपपुर कला गांव में अमरोहा, संभल के कारीगरों ने बैठक कर संघर्ष की रणनीति बनाई।
चांदी वर्क के कारोबार से संभल और अमरोहा में 5,000 से अधिक परिवार जुड़े हुए हैं। हाथ से चांदी को कूटकर वर्क तैयार किया जाता है और वर्क की सप्लाई दिल्ली की चांदनी चौक मंडी के माध्यम से देश विदेश में होती है। कुछ लोग वर्क तैयार करते हैं।
कुछ लोग उसकी ट्रेडिंग का काम करते हैं। संभल में तैयार वर्क को देश-विदेश की दवा कंपनियों तक भेजा जाता है। प्रतिष्ठित यूनानी और आयुर्वेदिक दवाओं में भी वर्क का प्रयोग होता है।
इसके कारोबार पर भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण की उस आदेश एडवाइजरी से संकट छा गया है जिसमें कहा गया है कि वर्क सेहत के लिए खतरा है और इसका प्रयोग रोका जाए। इसके बाद कारोबारी-कारीगर उलझन में हैं।
कारोबारियों का कहना है कि वह अपने कारोबार को बचाने के लिए प्रदेश और केंद्र की सरकार तक पैरवी करेंगे। जरूरत पड़ने पर कोर्ट जाएंगे। चांदी बर्क सेहत के लिए कितना हानिकारक है? इस बात की जांच लैब से कराएंगे। लैब से रिपोर्ट आने पर अगला एक्शन लेंगे।
बैठक में शहबाजपुरकला, पतेई खालसा, मंसूरपुर माफी, ओबरी, खइया माफी, कमालपुर, गालिबपुर, मुकाबरपुरबंद आदि गांवों के कारीगर और कारोबारी शामिल हुए। बैठक में मोहम्मद नईम, जहीर अहमद, नासिर हुसैन, खालिद हुसैन, अनीस मोहम्मद रजी, शहादत हुसैन, ताहिर हुसैन, कल्लू, शाहीन आदि ने भाग लिया।