मकान बचाने के लिए कई परिवार गए हाईकोर्ट
प्रशासन की टीम द्वारा लाल निशान लगाने की कार्रवाई की गई तो लोगों की चिंता बढ़ गई। कई परिवार हाईकोर्ट चले गए हैं। याचिका दायर कर दी गई है। बताया गया है कि सोमवार तो सुनवाई की जा सकती है। हाईकोर्ट में बैनामे की कॉपी लेकर यह परिवार पहुंचे हैं। मकान स्वामियों का कहना है कि जो कागज हैं उनको यहां कोई देखने को तैयार नहीं है। इसलिए हाईकोर्ट में पेश किया जाएगा। वहीं से अब मकान बचाने की आस बची है।
लाल निशान से पहले जांच पड़ताल क्यों नहीं की
हातिम सराय के 80 मकानों में रह रहे लोगों का सवाल है कि सोमवार को नोटिस जारी किया था कि अपना पक्ष रखें और दो दिन बाद लाल निशान लगाने की कार्रवाई को शुरू कर दी गई। प्रशासन ने जांच पड़ताल नहीं की और जो टीम मौके पर आई उन्होंने बैनामे के दस्तावेज तक नहीं देखे। इब्राहिम ने बताया कि उन्होंने पूरी जिंदगी की कमाई लगाकर 10 साल पहले मकान बनाया है। प्रशासन की टीम ने लाल निशान लगा दिया। जबकि हमने तो जमीन खरीदी है। कब्जा करते तो बैनामा कहां से हो जाता। इसी तरह अन्य लोग भी सवाल उठा रहे हैं।
2009 में एडीएम कोर्ट का हुआ था आदेश, राम सुनीति देवी की है निजी संपत्ति
हातिम सराय में स्थित इस जमीन का गाटा संख्या 84, 85व और 86 अंकित है। इस जमीन को लेकर एडीएम हरज्ञान सिंह पुंडीर की कोर्ट ने 14 सितंबर 2009 को राम सुनीति देवी की निजी संपत्ति होने का हवाला देते हुए पीपी एक्ट के तहत जारी किए गए 35 नोटिस वापस करने का आदेश किया था।
आदेश में उल्लेख है कि जिला शासकीय अधिवक्ता मुरादाबाद की विधिक राय में स्पष्ट कहा है कि उक्त मिल्कियत सरकार अथवा पालिका अथवा स्थानीय निकाय अथवा मतरूक अंकित नहीं है। राम सुनीति देवी के नाम अंकित है। निजी संपत्ति पर पीपी एक्ट के प्रावधान लागू नहीं होते हैं।
हमारी दादी के नाम हातिम सराय की 12 बीघा जमीन थी और 2014 में निधन से पहले ही उन्होंने सारी जमीन बेच दी थी। निजी संपत्ति का रिकॉर्ड तहसील में है। जो मकान बन हैं, वह निजी जमीन में हैं। - पूर्वी वार्ष्णेय, सरायतरीन
निजी जमीन होने का मामला मेरे संज्ञान में आया है। दोनों पक्षों को बुलाकर बातचीत की जाएगी। समस्या का समाधान किया जाएगा। किसी के खिलाफ भी गलत कार्रवाई नहीं होगी। -डॉ. राजेंद्र पैंसिया, डीएम, संभल
सपा विधायक बोले, पहले पड़ताल कराएं फिर चलवाएं बुलडोजर
हातिमसराय में तालाब की भूमि पर बने मकानों को ध्वस्त कराने की प्रक्रिया के बीच सपा विधायक इकबाल महमूद ने डीएम से मुलाकात की। डीएम को बताया कि जिस भूमि पर मकान बने हैं, वह तालाब की नहीं है। तहसील प्रशासन ने जो नोटिस जारी किए, उनका कोई आधार ही नहीं है।डीएम डॉ. राजेंद्र पैंसिया से मुलाकात के बाद सपा विधायक ने अपने आवास पर पत्रकारों से वार्ता की।
उन्होंने बताया कि डीएम से मिलकर इस मामले में निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है। प्रशासन जिस भूमि को सरकारी बताकर मकानों को हटवाना चाहता है, वह सरकारी नहीं है। लंबे अर्से से यह भूमि फसली है। राजस्व अभिलेखों में भी है। इस संबंध में अभिलेख डीएम को दिए हैं। उनसे कहा गया है कि इस मामले को गहनता से दिखवाएं। कोई भी कार्रवाई तब कराएं, जब जांच पड़ताल हो जाए।