यूपी में योगीराज की तपिश से संभल में बोन कारोबार ठंडा पड़ गया है। लोग हड्डी-सींग लाने और ले जाने में डर रहे हैं, नतीजतन पहले से ही संकट से जूझ रही बोन मिल इंडस्ट्री और भी मुसीबत में फंस गई है।
कारोबारियों का कहना है कि, एक महीने में ही इंडस्ट्री को पचास करोड़ से अधिक का फटका लगा है। मिलों को जानवरों की हड्डियां नहीं मिल पा रही हैं। यूपी की ही बोन मिलों में जिसमें से संभल की दस छोटी बड़ी मिल शामिल हैं में चौथाई ही काम रह गया है।
कारोबारियों का कहना है कि, देश-विदेश में जेलेटिन बनाने के लिए हड्डियों के टुकड़ों का इस्तेमाल होता है। इसके लिए कई जनपदों से जानवरों की हड्डी संभल जिले में आती थी। यहां जानवरों की हड्डियों की पिसाई और टुकड़े तैयार किए जाते हैं, लेकिन यूपी में नई सरकार आने के बाद सख्ती बढ़ने से हड्डी, सींग और जानवरों का परिवहन करने वाले वाहनों की भी चेकिंग हो रही है।
ऐसे में कार्रवाई के भय से कारोबारी ही नहीं बल्कि आपूर्तिकर्ता तक डरे हुए हैं। आल इंडिया बोन मिलर्स एसोसिएशन के सचिव सुरेंद्र गुलाटी ने बताया कि देश के विभिन्न राज्यों में 300 बोन मिलें हैं जो 2.5 लाख टन हड्डी प्रॉसेस करते हैं। इनसे 50 लाख लोगों को रोजगार मिला हुआ है। मरे हुए जानवरों और स्लाटिंग के जानवरों की हड्डियों से यह इंडस्ट्री चलती है।
नगर निकायों के अंतर्गत जो स्लाटर हाउस चल रहे थे उनसे भी हड्डियों की आपूर्ति हो जाती थी, मगर ये नियमों के मुताबिक नहीं थे। अब योगी सरकार आने के बाद यूपी में नगर पालिकाओं के अंतर्गत चल रहे स्लाटर हाउस बंद हो गए। सख्ती से मरे हुए जानवरों की भी हड्डी लाने ले जाने में लोग डर रहे हैं। दूसरे बीजेपी शासित राज्यों की भी कमोबेश यही स्थिति है।
उनका कहना था कि सरकार को इस कार्य को बंद कराने के स्थान पर नियम कानूनों के पालन पर जोर देना चाहिए ताकि बोन मिलें चलती रहें और इससे जुडे 50 लाख लोगों के रोजगार पर चोट न हो। क्योंकि यह 50 लाख लोग कमजोर आर्थिक स्थिति वाले हैं। अगर सरकार नगर निकायों में मार्डन स्लाटर हाउस चलवा दे तो बोन मिलों को हड्डी की कमी नहीं पड़ेगी। वैध स्लाटिंग के साथ साथ वैध तरीके से बोन मिलों का संचालन जारी रह सकेगा।
संभल में पांच करोड़ महीने का कारोबार करती थीं बोन मिलें
संभल। जिले में बोन मिल इंडस्ट्री पांच करोड़ रुपये महीने का कारोबार करती रही है लेकिन एक महीने से यह कारोबार घटकर चौथाई भी नहीं रह गया है। दूसरे प्रदेशों से ट्रक वाले यूपी में हड्डी लाने को तैयार नहीं है। जबकि यूपी के विभिन्न स्थानों पर नगर पालिकाओं की जानकारी में होने वाली स्लाटिंग भी बंद हो गई।
फिलहाल कार्रवाई का भय इस कदर है कि जिला पंचायत के ठेके वाली हड्डी को भी आपूर्ति करने में लोग डर रहे हैं। बिहार और बंगाल की लेबल बोन मिल काम करती थी उसमें भी अब बहुत कम लोग ही बचे हैं। फिलहाल काबोरारी वेट एंड वाच की स्थिति में हैं।
बोन को प्रॉसेस करके तैयार होता है जेलेटिन
संभल। बोन की पिसाई के बाद प्रासिस की किया जाता है प्रोटीन कंटेंट से जेलेटिन बनाया जाता है। जेलेटिन मेडिकल यूज में आता है। कैप्सूल का कवर बनाने समेत कई और कार्यों में प्रयोग किया जाता है। इसके साथ ही मुर्गीदाना में भी जानवरों की हड्डी का उपयोग किया जाता है।
संभल से पिसी हुई हड्डी और इसका चूरा जेलेटिन तैयार करने वाली उन फैक्ट्रियों को भेजा जाता है जो गुजरात, कोचिन आदि स्थानों पर हैं, मगर कारोबार ठंडा पड़ा है।