महोरालखूपुरा और अजीमाबाद में आबादी के करीब शनिवार को दिन में तीन बजे के करीब एक सांभर को ग्रामीणों ने देखा। उसे चोट लगी हुई थी। गांव वालों को देखकर वह भागा लेकिन कुछ ही दूरी पर जाकर बैठ गया। गांव वालों ने उसे पकड़ने का प्रयास किया तो वह फिर उछल भागा। इस पर गांव के लोगों ने वन विभाग को सूचना दे दी। वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची गांव वालों के सहयोग से दो घंटे में उसे पकड़ लिया। उसे टाटा एस में लेकर पवांसा स्थित कृष्णा नर्सरी में पहुंचे।
नर्सरी में जब उसे उतारा गया तो उसकी मौत हो चुकी थी। रविवार को उसका पोस्टमार्टम कराया गया। पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सक रमेश चंद्र ने बताया कि सांभर की श्वांस नली में सूजन थी और उसे श्वांस लेने में दिक्कत थी। इसी तकलीफ में उसने दम तोड़ा है। डाक्टर के मुताबिक उसे निमोनिया था। जबकि वन्य जीव विशेषज्ञ एवं सेवानिवृत डीएफओ जीएस खुशारिया ने कहा कि सांभर सर्दी में रहने के आदी होते हैं इसलिए उसे निमोनिया तो नहीं हुआ होगा।
यह सांभर कहीं से भटक कर पवांसा क्षेत्र में पहुंच गया। इसे गर्दन से नीचे और पैर से ऊपर चोट है। ऐसा माना जा रहा है कि इसको छलांग लगाते समय खेतों में कटीले तारों से चोट आई। डीएफओ एमपी सिंह ने बताया कि सांभर पाए जाने की सूचना वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई है। मौत के बाद पोस्टमार्टम कराया गया है और उसे वन विभाग की नर्सरी में दफन कर दिया गया है।
ब्लैक बक वाले इलाके में मिला सांभर
संभल। पवांसा में जहां ब्लैक बक पाए जाते हैं उसी इलाके में सांभर मिला है। डीएफओ एमपी सिंह ने बताया कि जिले में ब्लैक बक तो आएदिन देखे जाते हैं लेकिन सांभर पहली बार देखा गया है। असल में यह इसका क्षेत्र नहीं है। यह कहीं बाहर से भटककर आया होगा।
सांभर (रुसा यूनिकॉलर) हिरन की प्रजाति का मुख्य जानवर है। टाइगर का भोजन है। यह जानवर दलदली जमीनों पर नदियों के किनारे पाए जाते हैं। इनका दायरा एक से दो किलोमीटर होता है। समूह में रहते हैं। टाइगर की आहट पर सतर्क हो जाते हैं और समूह के साथ ही क्षेत्र बदल लेते हैं। - विशेषज्ञ जीएस खुशारिया से बाचतीत के मुताबिक।