देश में वीआईपी कल्चर पर प्रधानमंत्री के वार के बाद इसकी अलग-अलग तस्वीर सामने आ रही है। केंद्रीय कैबिनेट के फैसले को राज्य सरकार ने भी अपना लिया, पिछले दिनों राज्य सरकार के कई मंत्रियों ने अपने वाहनों से बत्तियां हटवा दीं।
इधर, एक मजेदार नजारा सामने आ रहा है कि, अफसर हों या बड़े नेता सब अपने वाहनों से लाल-नीली बत्ती उतार रहे हैं, मगर छोटों में इसके प्रति मोह बरकरार है। फिलहाल अफसर तो गाइडलाइन का इंतजार कर रहे, जबकि नेता रसूख की निशानी का साथ छोड़ने को खुद को तैयार नहीं कर पा रहे। संभल में भी शुक्रवार को ऐसा नजारा सामने आया।
संभल जिले में वीआईपी कल्चर को खत्म करने के लिए सबसे पहले जिलाधिकारी आगे आए। जिलाधिकारी भूपेंद्र एस चौधरी ने अपनी गाड़ी से नीली बत्ती हटा ली। इसकी जानकारी जिले के अन्य अधिकारियों को मिली तो उन्होंने भी नीली बत्ती हटाने का निर्णय लिया।
इसके बाद मुख्य विकास अधिकारी प्रेमप्रकाश त्रिपाठी, परियोजना निदेशक हरेंद्र सिंह ने खुद-ब-खुद अपनी गाड़ी से नीली बत्ती हटा ली। जब यह अफसर पहुंचे तो इनकी गाड़ियों में नीली बत्ती नहीं थी। वहीं संभल में एडीएम आरपी यादव ने शुक्रवार को सुबह खुद अपनी गाड़ी से बत्ती हटाने का आदेश अपने ड्राइवर को दिया।
एडीएम का कहना है कि वह तो पहले से नीली बत्ती कल्चर के खिलाफ थे और उन्होंने कई बार अपनी गाड़ी से बत्ती हटवाई है जब कहीं कानून व्यवस्था के लिए जरूरी होता होता था तभी बत्ती का उपयोग करते थे अब जब सरकार की मंशा सामने आई तो पूरी तरह से बत्ती को हटवा दिया। इसी तरह जब सीडीओ निकले तो उनकी गाड़ी में नीली बत्ती नहीं थी। पीडी का भी यही हाल रहा। बगैर नीली बत्ती की गाड़ियां कलक्ट्रेट में पहुंचने से नजारा बदला हुआ था।
जिलाधिकारी भूपेंद्र एस चौधरी ने कहा कि शासन की मंशा वीआईपी कल्चर को खत्म करना है। शासन की मंशा को देखते हुए खुद उन्होंने अपनी गाड़ी से बत्ती हटाई है। वहीं संभल में एसडीएम राशिद अली खां और तहसीलदार श्रवण कुमार एआरटीओ की गाड़ियों में हर रोज की तरह नीली बत्ती चमक रही थी।